सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है। यदि अस्पताल के भीतर ही रक्षक भक्षक बन जाएं, तो गरीब जनता का भरोसा सिस्टम से उठने लगता है ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की खालवा तहसील का है जहां शासकीय अस्पताल में एक गरीब परिवार से डिलीवरी कराने के बदले नर्सों द्वारा अवैध रूप से रुपयों की मांग करने के आरोप लगे है। पीड़ित परिवार ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायती पत्र के अनुसार, मामला खंडवा जिले के तहसील खालवा का है। ग्राम सांवली खेड़ा गोमुखधाना के निवासी संतोष ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी पत्नी फूलवती को 16 दिसंबर 2025 को प्रसव हेतु शासकीय अस्पताल खालवा में भर्ती कराया गया था।
पीड़ित का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स राधा चौहान और वर्षा वेद ने डिलीवरी के एवज में ₹500 की मांग की। जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया और नियम का हवाला दिया, तो उन्हें कथित तौर पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
सरकारी अस्पताल में क्यों मांगे जा रहे पैसे?
भारत सरकार और मध्य प्रदेश शासन की योजनाओं के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में प्रसव पूरी तरह नि:शुल्क है। ‘जननी सुरक्षा योजना’ और ‘जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम’ के तहत न केवल प्रसव मुफ्त है, बल्कि दवाइयां, भोजन और परिवहन की सुविधा भी सरकार द्वारा मुफ्त प्रदान की जाती है। इसके बावजूद अस्पताल में पैसे मांगे जाने का आरोप सीधे तौर पर शासन के नियमों और भ्रष्टाचार विरोधी नीति की अवहेलना को दर्शाता है।

शिकायत में की गई प्रमुख मांगें:
पीड़ित परिवार ने कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
- संबंधित स्टाफ नर्सों और कर्मचारियों के विरुद्ध जांच कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- यदि किसी गरीब से अवैध रूप से राशि ली गई है, तो उसे वापस दिलाया जाए।
- भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए अस्पताल प्रशासन को कड़े निर्देश दिए जाएं।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की भूमिका
आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण ऐसे मामले दब जाते हैं, लेकिन खंडवा के इस परिवार ने साहस दिखाते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है, तो इससे अन्य कर्मचारियों को भी सख्त संदेश जाएगा। अब सबकी नजरें खंडवा कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के एक्शन पर टिकी हैं।








