“जहाँ इलाज भरोसे से हो, वहाँ विवाद खुद-ब-खुद थम जाते हैं।” इसी मूलमंत्र को आधार बनाकर खंडवा प्रशासन ने चिकित्सा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी कर ली है। देशभर के अस्पतालों से आए दिन सामने आने वाले डॉक्टर-मरीज विवादों और वायरल वीडियो की घटनाओं से सबक लेते हुए, खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने एक ऐसी नई व्यवस्था की नींव रखी है, जो नए साल 2026 से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का चेहरा बदल देगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में टकराव को टालना और पारदर्शिता के साथ मरीजों का विश्वास जीतना है।
टकराव नहीं तालमेल: क्या है कलेक्टर की नई कार्ययोजना?
अक्सर देखा जाता है कि अस्पतालों में सूचनाओं के अभाव या गलतफहमी के कारण परिजन और स्टाफ के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। इसे जड़ से खत्म करने के लिए खंडवा कलेक्टर ने ‘निगरानी और संवाद’ आधारित मॉडल तैयार किया है।
24×7 कंट्रोल रूम और सीसीटीवी
अस्पतालों के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों की नजर होगी, जिसका सीधा जुड़ाव एक सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम से होगा।
लाउडस्पीकर सिस्टम से सूचना
अस्पताल परिसर में लाउडस्पीकर के माध्यम से महत्वपूर्ण सूचनाएं, बेड की उपलब्धता और अन्य गाइडलाइंस प्रसारित की जाएंगी, ताकि भ्रम की स्थिति न रहे। मरीजों और परिजनों की शिकायतों के तत्काल समाधान के लिए ‘हेल्प डेस्क’ को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। कोई भी समस्या होने पर परिजन सीधे सहायता केंद्र से संपर्क कर सकेंगे।
पारदर्शी इलाज प्रक्रिया
डॉक्टर और मरीज के बीच संवाद को बेहतर बनाने के लिए विशेष दिशा-निर्देश लागू किए जा रहे हैं।
क्यों जरूरी था यह कदम?
हाल के दिनों में प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में स्वास्थ्य केंद्रों पर हिंसक झड़पों की खबरें बढ़ी हैं। प्रशासन ने इन्हें केवल ‘न्यूज’ की तरह नहीं देखा, बल्कि एक चेतावनी के रूप में लिया है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता का मानना है कि यदि प्रशासन सतर्क और संवेदनशील हो, तो आधुनिक तकनीक (CCTV) और बेहतर संवाद के जरिए किसी भी अनहोनी को रोका जा सकता है।
नए साल में एक नई उम्मीद
खंडवा की यह पहल न केवल मरीजों के लिए राहत भरी है, बल्कि यह उन डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए भी सुरक्षा कवच बनेगी जो तनावपूर्ण माहौल में काम करते हैं।
इस व्यवस्था के तीन बड़े लाभ होंगे:
- इलाज में पारदर्शिता आने से भ्रष्टाचार और लापरवाही की गुंजाइश खत्म होगी।
- सीसीटीवी की निगरानी से असामाजिक तत्वों पर लगाम लगेगी।
- समय पर समाधान मिलने से जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास बढ़ेगा।
खंडवा प्रशासन की यह पहल ‘प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर’ की कहावत को चरितार्थ करती है। विवाद होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि विवाद की जड़ को ही खत्म कर दिया जाए। कलेक्टर ऋषव गुप्ता का यह विजन खंडवा को चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में प्रदेश का एक रोल मॉडल बना सकता है। नया साल खंडवा के अस्पतालों के लिए सुरक्षित और संवादमयी संस्कृति की नई किरण लेकर आ रहा है।








