कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देशभर में निकाली जा रही ‘विजय अमृत कलश यात्रा’ आज खंडवा पहुंची। 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान की याद दिलाने वाली इस यात्रा का खंडवा रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत किया गया। एनसीसी कैडेट्स के राष्ट्रभक्ति से भरे नारों और सेना के अधिकारियों की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
27 राज्यों की मिट्टी और 27 नदियों के जल का संगम
कारगिल कैप्टन भंडारी ने बताया कि यह यात्रा भारतीय सेना के शौर्य का प्रतीक है। बेंगलुरु में 27 स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए इस कलश में 27 राज्यों की पवित्र मिट्टी और 27 नदियों का जल समाहित है। शहीदों को अर्पित किए गए फूल और उनकी स्मृतियां इस कलश का हिस्सा हैं। यह यात्रा देश के युवाओं को भारतीय सेना से जोड़ने और राष्ट्रभक्ति जगाने के उद्देश्य से निकाली जा रही है।

“सिर कट सकता है, लेकिन झुक नहीं सकता”
36 एमपी बटालियन खंडवा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में कर्नल पी.वी. हरि ने संबोधित करते हुए कहा, “कारगिल युद्ध में हमारे जवानों ने दुर्गम चोटियों पर तिरंगा लहराकर दुश्मन को धूल चटाई थी। हमारे वीरों को परमवीर चक्र और वीर चक्र जैसे सम्मान उनकी अदम्य वीरता के लिए मिले। यह यात्रा संदेश देती है कि भारत पर जब भी आक्रमण होगा, हम उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे। हमारा सिर कट सकता है, लेकिन झुक नहीं सकता।”

‘मेरी माटी मेरा देश’: शहीदों के परिवारों के साथ खड़ी है सेना
यह यात्रा ‘मेरी माटी मेरा देश’ अभियान का एक अहम हिस्सा है। इस अवसर पर पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कारगिल युद्ध की वीर गाथाएं साझा कीं और स्पष्ट किया कि शहीद परिवार अकेले नहीं हैं, पूरी भारतीय सेना और देश उनके साथ खड़ा है।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां:
- सूबेदार मनोज, राजेंद्र सिंह खत्री और एनसीसी अधिकारियों की मौजूदगी में जवानों का स्वागत किया गया।
- 36 एमपी बटालियन, बीएम एग्रीकल्चर और एसएन कॉलेज के एनसीसी कैडेट्स ने ‘भारत माता की जय’ के नारों से स्टेशन परिसर को गुंजा दिया।
- खंडवा से यह यात्रा अब सैन्य मुख्यालय महू (Mhow) के लिए रवाना होगी, जहाँ से इसका अंतिम गंतव्य कारगिल होगा।
युवाओं के लिए प्रेरणा है यह कलश यात्रा
भारतीय सेना के अधिकारियों ने कहा कि सेना का जवान ही देश का असली ‘हीरो’ है। इस कलश यात्रा के माध्यम से उन वीरों की यादों को संजोया जा रहा है जिन्होंने बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों पर दुश्मन की गोलाबारी के बीच तिरंगा फहराया था। यह यात्रा देश के हर नागरिक को कारगिल के बलिदानियों से जोड़ने का एक राष्ट्रव्यापी प्रयास है।








