शासन की कार्यप्रणाली में कसावट लाने और सरकारी दफ्तरों में ‘लेट-लतीफी’ के कल्चर को खत्म करने के लिए कलेक्टर गौरव बैनल ने आज सुबह कड़ा रुख अपनाया। शुक्रवार सुबह 10:30 बजे जब कलेक्ट्रेट के कर्मचारी सुस्ती में थे, तभी कलेक्टर ने अचानक विभिन्न शाखाओं का औचक निरीक्षण शुरू कर दिया। इस दौरान उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर) की जांच में 90 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिन्हें अब सेवा समाप्ति जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर सता रहा है।
10:30 बजे तक खाली थीं कुर्सियां
कलेक्टर गौरव बैनल ने आज प्रातः ठीक 10:30 बजे कलेक्ट्रेट की विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया। उपस्थिति पंजी खंगालने पर पता चला कि 90 कर्मचारियों ने न तो हस्ताक्षर किए थे और न ही वे दफ्तर में मौजूद थे जांच में पाया गया कि ये कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना या स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से नदारद थे। कलेक्टर ने इसे घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना है।
मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम के तहत कार्रवाई
अनुपस्थित पाए गए सभी 90 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट उल्लेख है कि:
- यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का सीधा उल्लंघन है।
- यह लापरवाही वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 के तहत दंडनीय अपराध है।
- सभी को 3 कार्य दिवस के भीतर लिखित जवाब पेश करना होगा।
- अगर निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट लिया जाएगा।
कर्मचारियों में मची खलबली
कलेक्टर की इस रेड के बाद कलेक्ट्रेट के अन्य विभागों में भी हड़कंप का माहौल है। अक्सर शिकायतें आती थीं कि दफ्तरों में कर्मचारी समय पर नहीं मिलते, जिससे आम जनता को अपने काम के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कलेक्टर गौरव बैनल की इस सीधी कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी सेवा में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सिंगरौली कलेक्टर की यह कार्रवाई जिले के अन्य प्रशासनिक दफ्तरों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है। समय की पाबंदी और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।








