लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां देश में ‘एकाधिकार’ (Monopoly) को बढ़ावा दे रही हैं, जिसके कारण छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारी बर्बादी की कगार पर पहुँच गए हैं। उन्होंने वैश्य समाज के साथ हुए ‘व्यापार संवाद’ में व्यापारियों की पीड़ा को ‘खतरे की घंटी’ करार दिया।
“छोटे व्यापारियों को जंजीरों में जकड़ा गया”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि आज का छोटा व्यापारी दोहरी मार झेल रहा है।
राहुल के अनुसार, जटिल जीएसटी (GST) और नौकरशाही के दबाव ने छोटे व्यापारों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की पूरी मशीनरी चुनिंदा बड़े कॉरपोरेट्स के वर्चस्व को स्थापित करने में लगी है, जिससे बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है।
वैश्य समाज के साथ ‘व्यापार संवाद’
यह बयान हाल ही में आयोजित ‘वैश्य समाज व्यापार संवाद’ कार्यक्रम के बाद आया है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने व्यापारियों की समस्याओं को विस्तार से सुना।
संवाद के दौरान व्यापारियों ने जीएसटी की जटिलताओं और बड़े ब्रांड्स के कारण छोटे रिटेलर्स को हो रहे नुकसान पर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। वहीं राहुल गांधी ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस उनके हितों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाएगी। उन्होंने कहा, “यह केवल व्यापार का संकट नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक रीढ़ पर हमला है।”
“यह एक विचारधारा की लड़ाई है”
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि सरकार की उस ‘सोच’ के खिलाफ है जो केवल चंद पूंजीपतियों को अमीर बनाना चाहती है। उन्होंने व्यापारियों से आह्वान किया कि वे अपनी समस्याओं को मुखर होकर उठाएं।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स से किया पोस्ट
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया एक्स से पोस्ट करते हुए लिखा है कि “हमारा व्यापार खत्म होने की कगार पर है” – व्यापार संवाद में वैश्य समाज की इस पीड़ा ने सच में झकझोर कर रख दिया। जिस समाज ने देश की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक योगदान दिया, आज वही हताश है – ये खतरे की घंटी है।
सरकार ने Monopoly को खुली छूट दे दी है, और छोटे-मध्यम व्यापारियों को bureaucracy और गलत GST जैसी खराब नीतियों की जंजीरों में बांध दिया है। ये सिर्फ नीति की गलती नहीं – ये उत्पादन, रोज़गार और भारत के भविष्य पर सीधा हमला है।
BJP सरकार की इसी सामंतवादी सोच के खिलाफ लड़ाई है। और इस लड़ाई में देश के व्यापार की रीढ़ – वैश्य समाज के साथ मैं पूरी ताकत से खड़ा हूं।
आगे कहा कि व्यापारियों के बीच जो आक्रोश और पीड़ा उन्होंने देखी है, वह भविष्य के आर्थिक संकट का संकेत है और इसके खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई जारी रहेगी।
बीजेपी का पलटवार
वहीं, बीजेपी की ओर से अक्सर इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा जाता रहा है कि जीएसटी और डिजिटल ट्रांजैक्शन जैसी नीतियों ने व्यापार में पारदर्शिता बढ़ाई है और बिचौलियों की भूमिका खत्म की है। सरकार का दावा है कि उसकी नीतियां ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए हैं।
गौरतलब है कि वैश्य समाज, जिसे पारंपरिक रूप से बीजेपी का समर्थक माना जाता है, उनके बीच राहुल की सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।








