मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में शुक्रवार की रात एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। पोरसा थाना क्षेत्र के जौंटई चौराहे पर नशे में धुत एक भाजपा नेता ने अपनी तेज रफ्तार कार अलाव ताप रहे पांच लोगों पर चढ़ा दी। इस दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद शनिवार को पोरसा में जमकर बवाल हुआ। आक्रोशित भीड़ ने चक्काजाम कर दिया और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक महिला ने थाना प्रभारी (TI) की वर्दी तक पकड़ ली।
नशे में धुत नेता ने अलाव ताप रहे लोगों को कुचला
घटना शुक्रवार देर शाम की है। पोरसा निवासी भाजपा नेता दीपेंद्र भदौरिया अपनी कार से जौंटई चौराहे से गुजर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दीपेंद्र नशे में धुत थे और उन्होंने कार पर से नियंत्रण खो दिया। कार सीधे उन पांच लोगों पर चढ़ गई जो ठंड से बचने के लिए अलाव ताप रहे थे। इलाज के दौरान रामदत्त राठौर और अर्णब लक्षकार की अस्पताल में दर्दनाक मौत हो गई। अन्य तीन घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।
चक्काजाम और पुलिस की भारी फजीहत
शनिवार सुबह जैसे ही दोनों घायलों की मौत की खबर फैली, पोरसा में तनाव फैल गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव रखकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और जनता के बीच तीखी बहस हुई। पुलिस की लापरवाही से नाराज एक महिला ने पोरसा थाना प्रभारी की वर्दी की कॉलर पकड़ ली, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बिगड़ते हालात को देखते हुए एक दर्जन थानों की पुलिस और भारी बल जौंटई चौराहे पर तैनात किया गया है।
बीजेपी का बड़ा एक्शन: आरोपी नेता निष्कासित
हादसे के बाद भारतीय जनता पार्टी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी दीपेंद्र भदौरिया को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। भाजपा जिला अध्यक्ष ने दीपेंद्र को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का पत्र जारी कर दिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि कानून अपना काम करेगा और ऐसे कृत्य के लिए संगठन में कोई जगह नहीं है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
हादसे के समय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था, लेकिन आरोप है कि वह पुलिस कस्टडी से भाग निकलने में सफल रहा (या उसे ढील दी गई)। पोरसा थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर जनता में भारी रोष है। लोग उन पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की मांग कर रहे हैं जिन्होंने आरोपी के प्रति नरम रुख अपनाया।
मुरैना की इस घटना ने एक बार फिर ‘वीआईपी कल्चर’ और सत्ता के मद में चूर नेताओं की लापरवाही को उजागर किया है। पोरसा में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन प्रदर्शनकारियों को समझाने और उचित मुआवजे का आश्वासन देने में जुटा है, लेकिन वर्दी की गरिमा और जनता की सुरक्षा के बीच की खाई इस घटना ने और गहरी कर दी है।








