खंडवा: केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ (JSJB 1.0) में खंडवा जिले को मिले राष्ट्रीय पुरस्कार पर सवाल उठाने वाली खबरों को जिला प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (IAS) डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डिजिटल पोर्टल पर प्रकाशित खबर को ‘तथ्यहीन, भ्रामक और छवि धूमिल करने वाला’ बताया है।
1.29 लाख फोटो अपलोड, केंद्र ने किया भौतिक सत्यापन
डॉ. गौड़ा ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि पुरस्कार किसी फर्जीवाड़े पर नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यों पर मिला है जो पोर्टल पर मात्र 1714 फोटो का दावा गलत है; प्रशासन ने कुल 1,29,046 जल संरक्षण कार्यों की फोटो अपलोड की थीं। जल शक्ति मंत्रालय ने इन सभी फोटो का डेस्क सत्यापन किया और 1 प्रतिशत कार्यों का रैंडम फील्ड वेरिफिकेशन (मौके पर जांच) कराया, जिसके बाद ही खंडवा को प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया। इसमें रूफटॉप हार्वेस्टिंग, सोख्ता गड्ढा, बोरवेल रिचार्ज और चेकडेम मरम्मत जैसे कार्य शामिल हैं।
प्रकाशित आरोपों का बिंदुवार पलटवार
डॉ. गौड़ा ने उन सभी शिकायतों का खंडन किया जो खबर का आधार बनी थीं:
पुरानी शिकायतों का सहारा
शाहपुरा माल, पलानीमाल और डोटखेड़ा की जो शिकायतें बताई जा रही हैं, वे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ (मनरेगा) से संबंधित हैं। इनका JSJB 1.0 (राष्ट्रीय पुरस्कार वाले अभियान) से कोई लेना-देना नहीं है। 150 डगवेल का आरोप गलत है; केवल 61 रिचार्ज स्वीकृत थे, जिनमें सिर्फ मजदूरी दी गई। दोषी पाए जाने पर ग्राम रोजगार सहायक को पहले ही हटाया जा चुका है।
ओंकारेश्वर और फोटो टाइमिंग
अक्टूबर 2025 की फोटो की बात भ्रामक है। JSJB 1.0 अभियान 31 मई 2025 को ही समाप्त हो चुका था। अक्टूबर की फोटो ‘कैच द रेन’ (Catch the Rain) पोर्टल की हैं, जो एक अलग मिशन है। डोटखेड़ा और हरवंशपुरा में मनरेगा के तहत काम हुआ है और भुगतान सीधे हितग्राहियों के खाते में गया है।
“अभियान को बदनाम करने की कोशिश”— डॉ. गौड़ा
प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. गौड़ा ने कहा कि जनसुनवाई की पुरानी शिकायतों (जिन पर पहले ही जांच और कार्रवाई हो चुकी है) को राष्ट्रीय पुरस्कार से जोड़ना गलत है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के अभियानों पर खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की गहन जांच करें। ताकि जनता में भ्रम न फैले। जल संरक्षण जैसे राष्ट्रीय महत्व के अभियान को बदनाम करने के प्रयासों का खंडवा प्रशासन पुरजोर विरोध करता है।
जिला प्रशासन के इस स्पष्टीकरण के बाद अब उन अटकलों पर विराम लग दिया है जो राष्ट्रीय पुरस्कार की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही थीं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि खंडवा की यह उपलब्धि सामुदायिक मेहनत का परिणाम है, न कि किसी कागजी हेरफेर का।








