भोपाल। सिंगरौली जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर मंगलवार को जनसुनवाई में एक दिल दहला देने वाला नजारा देखने को मिला है। जहां परिजन अपने घायल बेटे को स्ट्रेचर पर लिटाकर प्रशासन से मदद की भीख मांगते नजर आए। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल राजीव सोनी ने अपनी दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए कलेक्टर से नागपुर में इलाज के लिए आर्थिक सहायता और एम्बुलेंस मुहैया कराने की भावुक अपील की है।
एक साल से बिस्तर पर, ‘गलत इलाज’ ने छीनी गति
राजीव सोनी ने बताया कि 12 सितंबर 2024 को वे चितरंगी की ओर जा रहे थे, तभी ग्राम नौगई के पास उनकी सड़क दुर्घटना हो गई। इस हादसे में उनकी गर्दन की हड्डी टूट गई और शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आईं। परिजनों का आरोप है कि बी.एच.यू. ट्रामा सेंटर (बनारस) में इलाज के दौरान डॉक्टर की एक गलती से उनकी नस दब गई, जिसके कारण उन्हें पैरालाइसिस (लकवा) की समस्या हो गई अब वे हिलने-डुलने में भी असमर्थ हैं।
घर का इकलौता कमाने वाला, अब दाने-दाने को मोहताज
राजीव अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। दुर्घटना के बाद से घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। डॉक्टरों ने अब उन्हें बेहतर इलाज के लिए नागपुर जाने की सलाह दी है, लेकिन राजीव के पास न तो एम्बुलेंस का किराया है और न ही आगे के इलाज के लिए पैसे। इसी लाचारी के चलते परिजन उन्हें सीधे कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के पास जमीन पर लिटाकर ले आए, ताकि अधिकारी खुद उनकी हालत देख सकें और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लें।
एसडीएम ने तत्काल बढ़ाया मदद का हाथ
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सुरेश जाधव तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने मानवीय संवेदना दिखाते हुए घायल युवक और परिजनों को ढांढस बंधाया एसडीएम के निर्देश पर राजीव को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए बैढ़न स्थित जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर भेजा गया। एसडीएम ने कहा कि फिलहाल प्राथमिक इलाज जिला अस्पताल में कराया जा रहा है। यदि जरूरत पड़ी, तो उन्हें हायर सेंटर (नागपुर या अन्य जगह) रेफर करने और आवश्यक व्यवस्था करने के लिए प्रशासन पूरी मदद करेगा।
“शासन की मदद ही आखिरी उम्मीद”
राजीव सोनी और उनके परिवार को अब केवल कलेक्टर और शासन की मदद पर भरोसा है। उनका मानना है कि यदि प्रशासन नागपुर तक जाने के लिए एम्बुलेंस और इलाज के लिए आर्थिक अनुदान दे देता है, तो राजीव एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे।
अगर इस प्रकरण में प्रशासन द्वारा एम्बुलेंस और आर्थिक सहायता जैसे कदम उठाए जाते हैं, तो यह भविष्य में ऐसे ही मामलों के लिए एक मानवीय और सकारात्मक मिसाल साबित हो सकती है।इससे जिला स्तर पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता, रेफरल सिस्टम और आर्थिक मदद की नीतियों को लेकर भी गंभीर मंथन की ज़रूरत सामने आती है।








