मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर मोहन सरकार ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह ने खरगोन बायपास (राष्ट्रीय राजमार्ग-347) के औचक निरीक्षण के दौरान पाई गई अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए अधीक्षण यंत्री विजय सिंह पवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। मंत्री के इस कड़े एक्शन से विभाग के अन्य अधिकारियों और ठेका एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
औचक निरीक्षण में खुली पोल
बीते 26 नवंबर को मंत्री राकेश सिंह ने विभाग के आला अधिकारियों के साथ निर्माणाधीन खरगोन बायपास का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान सड़क की ऊपरी चमक-धमक के पीछे छिपी तकनीकी खामियां उजागर हुईं।
निरीक्षण में पाई गई मुख्य तकनीकी त्रुटियां
- सड़क की कुटाई (Compaction) मानक के अनुरूप नहीं थी, जिससे सड़क के जल्द धंसने का खतरा रहता है।
- शोल्डर निर्माण में 50 मिमी से कम आकार के पत्थरों का उपयोग होना था, लेकिन मौके पर बड़े पत्थरों का उपयोग पाया गया।
- प्रयोगशाला जांच के लिए जो सैंपल लिए गए, उनकी पैकिंग और प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही मिली।
इन पर गिरी गाज
मंत्री के निर्देश पर विभाग ने दोषियों की सूची तैयार की है:
विजय सिंह पवार (अधीक्षण यंत्री)
खरगोन प्रयोगशाला प्रभारी, जिन्हें तत्काल सस्पेंड किया गया।
संबंधित उपयंत्री
मुख्य अभियंता को इनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
ICON कंपनी (कंसल्टेंट)
सुपरविजन में लापरवाही बरतने के लिए इस कंपनी के विरुद्ध भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुराने विवादों से रहा है नाता
सूत्रों के अनुसार, निलंबित अधीक्षण यंत्री विजय सिंह पवार पहले भी विवादों में रहे हैं। उन्हें पूर्व में खरगोन PWD से हटाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उन्होंने कोर्ट से स्टे ले लिया जिसके बाद अब उन्हें खंडवा नई पोस्टिंग मिल गई है अब देखना होगा कि विभागीय स्तर पर उन पर क्या कार्रवाई होगी।

“गुणवत्ता से समझौता यानी जनता से धोखा” — राकेश सिंह
मंत्री राकेश सिंह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय राजमार्ग या राज्य की किसी भी सड़क परियोजना में भ्रष्टाचार या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने कहा, “विकास कार्यों में प्रयुक्त सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता का कड़ाई से पालन होना चाहिए। अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल दफ्तर तक सीमित नहीं है, उन्हें फील्ड पर मानक सुनिश्चित करने होंगे।”
खरगोन की यह कार्रवाई प्रदेश के अन्य जिलों के अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है। PWD मंत्री के इस एक्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि कागजों पर विकास दिखाने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है।








