भिंड। मध्यप्रदेश के भिंड जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। नगरपालिका के एक बर्खास्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी ने अपनी ठगी का ऐसा जाल बुना कि करीब 100 बेरोजगारों को चूना लगा दिया। आरोपी ने नगरपालिका सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर और कूट रचित दस्तावेजों के सहारे लगभग डेढ़ करोड़ रुपये डकार लिए। इस सनसनीखेज मामले में सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
ऐसे हुआ ‘डेढ़ करोड़’ का महाघोटाला
मुख्य नगरपालिका अधिकारी यशवंत वर्मा ने थाने में दिए आवेदन में उल्लेख किया है कि अतुल श्रीवास्तव द्वारा सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर किए और नगरपालिका के विभिन्न पदों के फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए गए और नपा के विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से डेढ़ से दो लाख रुपये लेकर ठगी की। आरोपित अतुल श्रीवास्तव ने पैसे नकद और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से लिए गए।
सार्वजनिक सूचना ने खोली पोल
घोटाले की भनक लगते ही सीएमओ यशवंत वर्मा ने 9 दिसंबर 2025 को एक सार्वजनिक सूचना जारी की थी। इसमें उन लोगों को सामने आने को कहा गया था जिन्हें अतुल श्रीवास्तव ने नियुक्ति पत्र दिए थे। सूचना जारी होने के बाद नपा कार्यालय में शिकायतों की बाढ़ आ गई। अब तक कुल 99 पीड़ितों ने अपने आवेदन सौंपे हैं, जिनमें 49 लोगों का एक संयुक्त आवेदन भी शामिल है। जांच में सामने आया कि यह गोरखधंधा 5 फरवरी 2024 से 8 दिसंबर 2025 तक निर्बाध रूप से चलता रहा।
352 पन्नों का पुलिंदा और पुलिस की जांच
सीएमओ ने पुलिस को पीड़ितों के बयानों और फर्जी दस्तावेजों के साथ 352 पन्नों का शिकायती आवेदन सौंपा है। सिटी कोतवाली पुलिस अब इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पीड़ितों की संख्या 100 से भी अधिक हो सकती है और ठगी का आंकड़ा 1.5 करोड़ के पार जा सकता है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस घोटाले में नगरपालिका के कुछ अन्य विभागीय कर्मचारियों की भी संलिप्तता है।
बेरोजगारों को चेतावनी
प्रशासन ने अपील की है कि सरकारी नौकरियों के लिए केवल आधिकारिक विज्ञापनों और चयन प्रक्रियाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी व्यक्ति को नकद राशि देकर नियुक्ति पत्र लेना न केवल धोखाधड़ी का शिकार होना है, बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है।








