सिंगरौली। प्रशासन जब फाइलों से निकलकर पगडंडियों तक पहुँचता है, तो विकास की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। सिंगरौली जिले की सरई तहसील के भ्रमण पर निकले कलेक्टर गौरव बैनल ने सोमवार को कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया। ग्राम पंचायत गोड़बहरा के ग्राम झुंडिहवा में स्व-सहायता समूह के कार्यों का अवलोकन करने के लिए कलेक्टर प्रोटोकॉल छोड़कर करीब एक किलोमीटर तक पैदल चले। उन्होंने खेतों में लहलहाती सब्जियों और आम के बगीचों के बीच पहुँचकर ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के जज्बे को सराहा।
दीदियों के बीच बैठकर सुना आजीविका का सफर
कलेक्टर ने गांव में समूह द्वारा संचालित आटा चक्की का निरीक्षण किया और समूह की सदस्य महिलाओं के साथ जमीन पर बैठकर आत्मीय संवाद किया।
कलेक्टर ने कहा कि “यह देखकर हर्ष होता है कि ग्रामीण महिलाएं अब खुद का व्यवसाय संभाल रही हैं। जिला प्रशासन आपको आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर कदम पर खड़ा है।” वहीं खेतों में उगाई जा रही जैविक सब्जियों और उन्नत किस्म के आम के पौधों (प्लांटेशन) को देखकर उन्होंने महिलाओं की मेहनत की प्रशंसा की।
मुर्गी, बकरी और मछली पालन के लिए मिलेगा CSR व DMF फंड
कलेक्टर बैनल ने समूहों को विस्तार देने के लिए अधिकारियों और महिलाओं को नए दिशा-निर्देश दिए कि महिलाओं को मुर्गी पालन, बकरी पालन और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में उतरने के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही खनन प्रभावित और विस्थापित महिलाओं को संगठित कर उनके समूह बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इन समूहों का पंजीयन कर सीएसआर (CSR) और डीएमएफ (DMF) मद के माध्यम से जरूरी संसाधन और पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी।
तालाब का होगा गहरीकरण, मिलेगी ट्रेनिंग
भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने गांव के विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपये हुए कहा कि गांव के तालाब का गहरीकरण कर वहां ‘हचरी’ के माध्यम से समूहों का गठन किया जाए तथा मछली पालन हेतु बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
डीपीएम को निर्देशित किया गया कि फलों की बेहतर किस्मों और प्लांटेशन की बारीकियां सिखाने के लिए उद्यानिकी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के माध्यम से महिलाओं को विशेष ट्रेनिंग दिलाई जाए।
कलेक्टर का यह पैदल भ्रमण न केवल प्रशासनिक सजगता का प्रतीक है, बल्कि इससे उन ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है जो सीमित संसाधनों में आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। सीएसआर और डीएमएफ फंड के उपयोग से सिंगरौली के ग्रामीण अंचलों में अब महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखे जाने की उम्मीद है।








