मुरैना (बानमोर)। चंबल अंचल में अवैध हथियारों के काले कारोबार के खिलाफ मुरैना पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई की है। बानमोर पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो चाय की दुकान की आड़ में खतरनाक हथियारों की तस्करी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में 5 तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब ₹3.78 लाख कीमत के अवैध हथियार बरामद किए हैं।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बानमोर क्षेत्र में हथियारों की एक बड़ी खेप सप्लाई होने वाली है। सूचना मिलते ही पुलिस ने जाल बिछाया और एक संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। कड़ाई से पूछताछ करने पर संदेही ने अपने अन्य 4 साथियों के नाम उगल दिए। इसके बाद पुलिस ने त्वरित छापेमारी करते हुए गिरोह के सभी 5 सदस्यों को दबोच लिया। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 12 अवैध पिस्तौल, 20 जिंदा राउंड और 8 मैगजीन बरामद की हैं। जब्त किए गए हथियारों की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख 78 हजार रुपये बताई जा रही है।
चाय की गुमटी की आड़ में ‘हथियारों की मंडी’
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा मुख्य आरोपी को लेकर हुआ है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी शहर में चाय बेचने का काम करता है। दिन भर चाय पिलाने वाला यह शख्स अपनी गुमटी का इस्तेमाल ग्राहकों को चाय देने के लिए नहीं, बल्कि अवैध हथियारों की डील फिक्स करने के लिए करता था। चाय की दुकान की आड़ में वह पुलिस की नजरों से बचकर लंबे समय से इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहा था।
खरगोन से चंबल तक तस्करी का नेटवर्क
पूछताछ में आरोपियों ने अपने पूरे सिंडिकेट का खुलासा किया है। गिरोह के काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार था कि आरोपी खरगोन (मध्य प्रदेश) से मात्र 15,000 रुपये में एक पिस्तौल खरीदते थे इन हथियारों को चंबल अंचल और आसपास के जिलों में लाया जाता था चंबल में मांग के अनुसार एक पिस्तौल को 50,000 से 60,000 रुपये में बेचा जाता था यानी आरोपी एक हथियार पर 3 से 4 गुना मुनाफा कमा रहे थे। यह गिरोह काफी समय से क्षेत्र में सक्रिय था और भारी मात्रा में हथियारों की सप्लाई कर चुका था।
जांच में जुटी पुलिस
एसपी ने प्रेस वार्ता के माध्यम से इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी साझा की। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गए सभी 5 आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खरगोन में इनके मुख्य सप्लायर कौन हैं और चंबल में ये हथियार किन-किन अपराधियों को बेचे जाने वाले थे।
मुरैना पुलिस की इस कार्रवाई ने चंबल में एक बड़े संगठित अपराध की कमर तोड़ दी है। चाय की दुकान की आड़ में हथियारों की तस्करी का यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक सबक है। इस सफलता से न केवल अवैध हथियारों की सप्लाई पर लगाम लगेगी, बल्कि भविष्य में होने वाली बड़ी आपराधिक घटनाओं को भी टाला जा सकेगा।








