अम्बाह (मुरैना)। मुरैना जिले के अंबाह क्षेत्र अंतर्गत जौंहा पंचायत के पीपरीपुरा गांव में गुरुवार की सुबह एक गरीब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। गैस सिलेंडर लीक होने से एक कच्चे घर में ऐसी भीषण आग लगी कि दिव्यांग बुजुर्ग की पूरी गृहस्थी राख के ढेर में तब्दील हो गई। इस दर्दनाक हादसे में घर में बंधी भैंस की पड़िया (बच्चा) भी जिंदा जल गई।
सुबह का वक्त और अचानक भड़की लपटें
घटना गुरुवार सुबह करीब 7 बजे की है। पीपरीपुरा निवासी 60 वर्षीय दिव्यांग रामशंकर सिंह तोमर गांव से करीब 500 मीटर दूर एक ऊंचाई पर कच्ची झोपड़ी बनाकर अपने परिवार के साथ रहते हैं। जानकारी के अनुसार, रामशंकर की पत्नी ने सुबह गैस चूल्हे पर पानी गर्म होने के लिए रखा और किसी काम से बाहर चली गई।
इसी बीच, गैस सिलेंडर की पुरानी पाइप से अचानक रिसाव (Leakage) शुरू हुआ और देखते ही देखते पूरी झोपड़ी आग की लपटों से घिर गई।
दिव्यांग पति और बच्चों को जैसे-तैसे बचाया
आग की लपटें देख रामशंकर की पत्नी चीखती हुई घर की ओर दौड़ी। झोपड़ी के भीतर दिव्यांग रामशंकर और उनके बच्चे सो रहे थे। जान जोखिम में डालकर पत्नी ने शोर मचाकर सबको जगाया और जैसे-तैसे उन्हें बाहर निकाला। लेकिन आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि घर के भीतर बंधी एक साल की भैंस की पड़िया को खोलने का मौका तक नहीं मिला और वह मासूम बेजुबान आग की भेंट चढ़ गया।
ऊंचाई पर घर और पानी का अभाव: बेबस दिखे ग्रामीण
रामशंकर का घर एकांत में और ऊंचाई पर बना था। आग लगने की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर दौड़े, लेकिन वहां पानी का कोई तत्काल स्रोत नहीं होने के कारण आग बुझाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक रामशंकर की आंखों के सामने गृहस्थी का सामान, भैंस की पड़िया उनका सब कुछ स्वाहा हो चुका था।
प्रशासन से मदद की गुहार
पीड़ित रामशंकर सिंह तोमर दिव्यांग हैं और उनके पास आय का कोई बड़ा साधन नहीं है। इस अग्निकांड ने उन्हें और उनके बच्चों को खुले आसमान के नीचे लाकर खड़ा कर दिया है। अब परिवार के पास पहनने को कपड़े और खाने को दाना तक नहीं बचा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और क्षेत्रीय तहसीलदार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान की जाए।
अंबाह की यह घटना एक बार फिर सुरक्षा के प्रति सावधानी बरतने की याद दिलाती है। एक पुरानी गैस पाइप ने एक गरीब हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकारी मशीनरी इस पीड़ित दिव्यांग परिवार की मदद के लिए कितनी जल्दी हरकत में आती है।








