खंडवा/पंधाना। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया द्वारा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के जनप्रतिनिधियों को लेकर दिए गए अमर्यादित बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत में आग लगा दी है। बरैया द्वारा SC-ST सांसदों-विधायकों की तुलना “कुत्ते जैसी स्थिति” से करने और आदिवासियों को हिंदू न बनने की सलाह देने पर पंधाना विधायक छाया मोरे ने करारा पलटवार किया है। उन्होंने इसे कांग्रेस की ‘घटिया और विभाजनकारी’ मानसिकता का प्रतीक बताया है।
“जनता के प्रतिनिधियों का अपमान, पूरे समाज का अपमान”
समाजसेवी सुनील जैन के अनुसार, विधायक छाया मोरे ने बरैया के बयान पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के बहुमूल्य वोट से चुनकर संवैधानिक संस्थाओं में पहुँचते हैं। उन्हें अपमानित करना उस पूरे समाज का अपमान है जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं।
छाया मोरे के पलटवार की 3 बड़ी बातें:
वोट बैंक की राजनीति
कांग्रेस ने आदिवासियों को हमेशा केवल वोट बैंक समझा, जबकि भाजपा ने उन्हें शासन की मुख्यधारा में सम्मान दिया।
सर्वोच्च पदों पर प्रतिनिधित्व
भाजपा ने ही देश को रामनाथ कोविंद (SC) और द्रौपदी मुर्मू (ST) के रूप में राष्ट्रपति दिए। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी आदिवासी समाज का गौरव हैं।
कांग्रेस की विफलता
जो सम्मान भाजपा ने दिया, कांग्रेस सात दशकों में कभी सोच भी नहीं पाई।
“आदिवासी हिंदू नहीं तो क्या मुस्लिम या ईसाई बनें?”
बरैया के ‘आदिवासियों को हिंदू न बनने’ वाले बयान पर विधायक छाया मोरे ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज भारत का मूल निवासी है और सदियों से भगवान राम, कृष्ण और बजरंगबली का अनन्य भक्त रहा है।
विधायक के तीखे सवाल
“अगर आदिवासी हिंदू नहीं हैं, तो क्या बरैया उन्हें मुस्लिम या ईसाई बनने का सुझाव दे रहे हैं? यह बयान कांग्रेस की हिंदू विरोधी और समाज को बांटने वाली गहरी साजिश का हिस्सा है। अपनी पार्टी की विचारधारा के दबाव में बरैया समाज को गुमराह करने का निंदनीय प्रयास कर रहे हैं।”
सार्वजनिक माफी और प्रायश्चित की मांग
छाया मोरे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आदिवासी और दलित समाज अब जाग चुका है और वह अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने मांग की है कि:
- फूल सिंह बरैया अपने ‘अमर्यादित और गंदे’ बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
- इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए वे प्रायश्चित करें।
- कांग्रेस आलाकमान इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
फूल सिंह बरैया का यह बयान कांग्रेस के लिए गले की हड्डी बनता नजर आ रहा है। एक तरफ भाजपा इसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस को ‘आदिवासी विरोधी’ घोषित कर रही है, वहीं दूसरी ओर छाया मोरे जैसे प्रखर वक्ताओं ने इसे सीधे तौर पर ‘हिंदू धर्म पर प्रहार’ से जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकता है।








