खंडवा। शहर के बीचों-बीच बन रहा फ्लाईओवर अब विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि ‘मौत का जाल’ बनता जा रहा है। रविवार देर रात एक बड़ा हादसा उस समय हुआ जब सुरक्षा इंतजामों के अभाव में एक बाइक निर्माणाधीन पुल से सीधे नीचे जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जो फिलहाल अस्पताल में जीवन-मौत की जंग लड़ रहे हैं।
अंधेरे में ‘खाई’ बन गया पुल: न बैरिकेड्स, न रिफ्लेक्टर
हादसे की मुख्य वजह ठेकेदार और संबंधित विभाग की घोर लापरवाही बताई जा रही है।
सुरक्षा शून्य
पुल के अधूरे हिस्से पर न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी और न ही कोई रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड लगाया गया था।
अचानक हुआ हादसा
देर रात बाइक सवार युवकों को अंधेरे में पुल के खत्म होने का आभास नहीं हुआ और उनकी बाइक सीधे नीचे जा गिरी।
गंभीर स्थिति
घायलों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
“क्या किसी की मौत का इंतजार है?”— भड़की जनता
हादसे के बाद खंडवा के नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फ्लाईओवर वर्षों से अधूरा पड़ा है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी गई।
“यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सिस्टम द्वारा किया गया हत्या का प्रयास है। बिना बैरिकेडिंग के पुल को खुला छोड़ देना अपराध है।”
— आक्रोशित नागरिक
सवालों के घेरे में जिम्मेदार: जनप्रतिनिधि और अफसर चुप
इस घटना ने खंडवा के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या ठेकेदार और इंजीनियर पर एफआईआर (FIR) दर्ज होगी?
- सालों से लटके इस प्रोजेक्ट पर स्थानीय नेताओं की खामोशी अब जनता को खलने लगी है।
- क्या प्रशासन इन मासूम युवकों के इलाज का खर्च उठाएगा और दोषियों को दंडित करेगा?
जनता की मुख्य मांगें:
- ठेकेदार का लाइसेंस रद्द हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो।
- अधूरे फ्लाईओवर पर तुरंत मजबूत बैरिकेट्स लगाए जाएं।
- फ्लाईओवर पूरा करने की अंतिम तारीख सार्वजनिक की जाए।
खंडवा का यह हादसा सिर्फ एक बाइक का गिरना नहीं है, बल्कि यह जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी की संवेदनहीनता का गिरता हुआ स्तर है। यदि आज भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह अधूरा ढांचा किसी और बड़े हादसे का कारण बनेगा।








