अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में बुधवार देर शाम बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग की अनुमति के बाद 2014 बैच के आईएएस साकेत मालवीय को जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया है। वहीं, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे पूर्व कलेक्टर आदित्य सिंह को पद से हटाकर भोपाल भेज दिया गया है।
साकेत मालवीय: अनुभव और वरिष्ठता ने दिलाई जिम्मेदारी
कलेक्टर की रेस में साकेत मालवीय का नाम पहले से ही सबसे आगे चल रहा था। निर्वाचन आयोग को भेजे गए तीन नामों के पैनल (साकेत मालवीय, विदिशा मुखर्जी और सौरभ सोनवणे) में मालवीय सबसे सीनियर थे।
वर्तमान पद
नियुक्ति से पहले वे संचालक, कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) के पद पर तैनात थे।
चयन का आधार
उनका पिछला प्रशासनिक अनुभव और वरिष्ठता इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए निर्णायक साबित हुई।

क्यों हटाए गए आदित्य सिंह? 3 करोड़ की रिश्वत का ‘दाग’
अशोकनगर के पूर्व कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाना सरकार के लिए मजबूरी बन गया था। उन पर आनंदपुर धाम ट्रस्ट की संपत्ति के नामांतरण के बदले 3 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के सनसनीखेज आरोप लगे थे।
हाई प्रोफाइल शिकायत
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इस मामले की शिकायत सीधे दिल्ली में भाजपा हाईकमान से की थी।
दिल्ली से दबाव
जब शिकायत के तार दिल्ली से जुड़े, तो प्रदेश सरकार ने तत्काल कार्रवाई का फैसला लिया।
नया ठिकाना
आदित्य सिंह को अब संचालक, भोपाल गैस त्रासदी एवं पुनर्वास बनाया गया है।
चुनाव आयोग की भूमिका और पैनल प्रक्रिया
चूंकि प्रदेश में चुनावी प्रक्रियाओं का काम अंतिम दौर में है, इसलिए सरकार 21 फरवरी तक सीधे किसी कलेक्टर को नहीं हटा सकती थी।
सरकार ने तीन योग्य अधिकारियों का पैनल चुनाव आयोग को भेजा।
आयोग ने साकेत मालवीय के नाम पर सहमति दी, जिसके बाद बुधवार शाम आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश
कलेक्टर जैसे रसूखदार पद से आदित्य सिंह की विदाई यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत यदि पुख्ता हो, तो कार्रवाई तय है। अब नए कलेक्टर साकेत मालवीय के सामने जिले की छवि सुधारने और रुके हुए प्रशासनिक कार्यों को गति देने की बड़ी चुनौती होगी।








