ई-दर्शन, ई-पूजा एवं डाक से महाप्रसाद वितरण जैसी व्यवस्थाओं से सशक्त हो रहा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
भक्ति में अब तकनीक का उजियारा,
हर द्वार पहुंचे बाबा का सहारा।
सेवा, सुविधा, नव विचार का संग,
ओंकारेश्वर धाम बढ़ा विकास के संग।
खंडवा की अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख गौड़ा ने यह संदेश संवारा,
डाक से महाप्रसाद पहुंचे — हर घर बने शिवद्वारा।

(खबर मंडी विशेष)
खंडवा/ओंकारेश्वर
जिले में सुशासन और नवाचार की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब धार्मिक क्षेत्र में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहे हैं। कलेक्टर ऋषव गुप्ता के नेतृत्व में ओंकारेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा, पारदर्शिता और तकनीकी सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जो प्रशासनिक दृष्टि से दूरगामी प्रभाव वाले माने जा रहे हैं।
डिजिटल माध्यम से सुलभ दर्शन एवं पूजा
ई-दर्शन एवं ई-पूजा प्रणाली लागू कर श्रद्धालुओं को घर बैठे पूजा-अर्चना से जोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे देश-विदेश में निवासरत भक्तों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से सीधा आध्यात्मिक जुड़ाव प्राप्त हो रहा है। यह पहल न केवल डिजिटल गवर्नेंस को सुदृढ़ करती है, बल्कि धार्मिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुगमता भी सुनिश्चित करती है।
डाक विभाग के माध्यम से लड्डू महाप्रसाद वितरण
अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख गौड़ा द्वारा पूर्व में दी गई जानकारी के अनुसार अब मंदिर का पवित्र लड्डू महाप्रसाद डाक विभाग के माध्यम से श्रद्धालुओं के घर तक भेजा जाएगा।


ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था के अंतर्गत श्रद्धालु मंदिर की वेबसाइट से महाप्रसाद आरक्षित कर सकेंगे। इसके उपरांत डाक विभाग द्वारा सुरक्षित एवं निर्धारित समयावधि में प्रसाद वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
महाप्रसाद के साथ शिव चालीसा, रुद्राक्ष एवं मंदिर दर्शन कार्ड निःशुल्क प्रेषित किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को समग्र आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके।
संस्थागत समन्वय और संरचनात्मक सुधार
इस सेवा के प्रभावी संचालन हेतु मंदिर परिसर में डाक विभाग का पृथक काउंटर स्थापित किया जा रहा है। यह कदम प्रशासन और डाक विभाग के समन्वित प्रयास का उदाहरण है। साथ ही, मंदिर क्षेत्र में सुव्यवस्थित कतार प्रबंधन, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था एवं सूचना प्रणाली को भी सुदृढ़ किया गया है।
धार्मिक पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन
इन पहलों से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा प्राप्त होगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में वृद्धि तथा जिले की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।
ओंकारेश्वर में लागू की जा रही ये व्यवस्थाएं परंपरा और तकनीक के संतुलित समावेश का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। प्रशासन का यह मॉडल दर्शाता है कि जब आस्था के साथ सुशासन जुड़ता है, तो विकास बहुआयामी स्वरूप ग्रहण करता है।
यह पहल भविष्य में अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध हो सकती है।








