भोपाल/सीधी। मध्यप्रदेश के सीधी जिले की एक आदिवासी बेटी, अनामिका बैगा, इन दिनों प्रदेश की राजनीति के केंद्र में है। एक मजदूर की बेटी का डॉक्टर बनने का सपना उस वक्त सुर्खियों में आ गया जब पूर्व नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने सरकार पर आदिवासियों के प्रति असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया। हालांकि, विवाद बढ़ते ही मुख्यमंत्री ने स्वयं सामने आकर अनामिका की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने का आश्वासन दिया है।
उमंग सिंगार का तीखा प्रहार: “आदिवासियों के लिए बंद हैं सत्ता के दरवाजे”
कांग्रेस नेता उमंग सिंगार ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एक गरीब आदिवासी छात्रा मदद के लिए भटक रही है, लेकिन प्रशासन और सरकार के दरवाजे उसके लिए बंद हैं। वहीं भाजपा आदिवासियों का वोट तो चाहती है, लेकिन उनके बच्चों के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए गंभीर नहीं है।
दावों की खुली पोल
‘बैगा प्रोजेक्ट’ जैसे बड़े विज्ञापनों के बावजूद जमीन पर आदिवासियों को शिक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण: “बिटिया को मिलेगी हर संभव मदद”
विपक्ष के हमलों और सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा के बीच मुख्यमंत्री ने मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि सीधी प्रवास के दौरान अनामिका ने उनसे मुलाकात की थी।
बताया जा रहा है कि अनामिका फिलहाल NEET (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) की तैयारी कर रही है। उसने कोचिंग और हॉस्टल की सुविधा के लिए सहायता मांगी थी।
सीएम ने स्पष्ट किया कि छात्रा ने अभी परीक्षा नहीं दी है, इसलिए वर्तमान में उसे तैयारी के लिए संसाधनों की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अनामिका की कोचिंग और रहने की तत्काल व्यवस्था की जाए। साथ ही, मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलते ही उसकी पूरी पढ़ाई का खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
“मुझे पूर्ण विश्वास है कि अनामिका एक दिन विख्यात चिकित्सक बनकर मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेगी। सरकार उसके साथ खड़ी है।” — मुख्यमंत्री
प्रशासनिक संवेदनशीलता पर उठते सवाल
भले ही मुख्यमंत्री ने इस मामले में दखल देकर समाधान निकाल लिया हो, लेकिन इस घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
- क्या एक आदिवासी छात्र को मुख्यमंत्री तक पहुँचने से पहले जिला स्तर पर (कलेक्टर या विधायक के माध्यम से) मदद नहीं मिलनी चाहिए थी?
- क्या सरकारी योजनाओं की जानकारी पात्र छात्रों तक समय पर पहुँच रही है?
अनामिका बैगा का मामला अब केवल एक छात्रा की पढ़ाई का नहीं, बल्कि प्रदेश में आदिवासी शिक्षा और उस पर होने वाली राजनीति का प्रतीक बन गया है। जहाँ कांग्रेस इसे सरकार की विफलता बता रही है, वहीं सरकार इसे अपनी संवेदनशीलता साबित करने के अवसर के रूप में देख रही है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि अनामिका को यह मदद कितनी जल्दी धरातल पर मिलती है।









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