बड़वानी। मध्य प्रदेश की न्यायपालिका से आज एक बड़ा फैसला सामने आया है। बड़वानी के तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अधीनस्थ महिला कर्मचारी के लैंगिक शोषण और पद के दुरुपयोग के मामले में उज्जैन में पदस्थ रहे डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने कानून की सर्वोच्चता को कायम रखते हुए आरोपी अधिकारी को कुल 10 वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया है।
केस की पृष्ठभूमि: पद का दुरुपयोग और 8 वर्षों का शोषण
यह गंभीर मामला वर्ष 2016 से 2024 के बीच का है। उस दौरान अभय सिंह खराड़ी बड़वानी में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के पद पर तैनात थे। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन एसडीएम ने अपने पद के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया। 29 अप्रैल 2024 को बड़वानी के महिला थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी ने महिला को डरा-धमकाकर मानसिक और शारीरिक शोषण किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने मोबाइल बंद कर छिपने का प्रयास भी किया था, लेकिन साइबर सेल की मदद से उन्हें भोपाल से गिरफ्तार किया गया था।
न्यायालय का फैसला: जेल और भारी जुर्माना
31 जनवरी 2026 को मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और पीड़िता के बयानों को विश्वसनीय माना। न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी अभय सिंह खराड़ी को निम्नलिखित सजाएं दीं:
- मुख्य सजा: लैंगिक अपराध की गंभीरता को देखते हुए 10 वर्ष का कठोर कारावास।
- अतिरिक्त सजा: अन्य धाराओं के तहत 1 वर्ष की पृथक सजा।
- अर्थदंड: दोषी पर ₹1,01,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।
कोर्ट की कार्यवाही और साक्ष्य
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से दलील दी कि एक उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा अपनी ही अधीनस्थ कर्मचारी का शोषण करना न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता का भी हनन है। पीड़िता की गवाही और तकनीकी साक्ष्यों (साइबर सेल की रिपोर्ट) ने केस को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोर्ट ने माना कि लोक सेवक के रूप में आरोपी की जिम्मेदारी समाज की सुरक्षा करना थी, लेकिन उन्होंने अपने अधिकारों का उपयोग अपराध कारित करने के लिए किया।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
यह फैसला मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। एक डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी को मिली यह सजा यह स्पष्ट करती है कि कानून की नज़र में पद और प्रतिष्ठा से ऊपर न्याय की गरिमा है। महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न के विरुद्ध यह निर्णय एक महत्वपूर्ण कानूनी नजीर (Precedent) साबित होगा।
बड़वानी जिला न्यायालय का यह निर्णय कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 8 साल तक चले शोषण के इस मामले में पीड़िता को मिले न्याय ने न्यायिक प्रक्रिया पर जनता के विश्वास को और सुदृढ़ किया है। दोषी अधिकारी को अब जेल में अपनी सजा काटनी होगी।








