सिंगरौली (नवानगर)। सिंगरौली की अमलोरी कोल खदान में कबाड़ी गिरोह के जानलेवा हमले का शिकार हुए सीआईएसएफ (CISF) जवान सत्येन्द्र भारती (47) जिंदगी की जंग हार गए। वाराणसी में उपचार के दौरान शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। ड्यूटी के दौरान माफिया से लोहा लेते हुए शहीद हुए जवान की मौत ने एक बार फिर खदान क्षेत्रों में बेलगाम कबाड़ी गिरोहों के आतंक को उजागर कर दिया है।
वारदात: 18 जनवरी की वो काली रात
18 और 19 जनवरी की दरमियानी रात सत्येन्द्र भारती अमलोरी खदान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कबाड़ी गिरोह को चोरी करते रंगे हाथों पकड़ा। खुद को घिरता देख लगभग एक दर्जन बदमाशों ने जवान पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। बदमाशों ने जवान के सिर और पेट पर तब तक वार किए जब तक वे लहूलुहान होकर अचेत नहीं हो गए।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
गंभीर हालत में सत्येन्द्र को सिंगरौली के नेहरू अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उन्हें वाराणसी रेफर किया गया। एक सप्ताह तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद शुक्रवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। जवान की मौत की खबर मिलते ही सीआईएसएफ कैंप और उनके पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए 5 बड़े सवाल
वारदात में 10 से अधिक लोग शामिल थे, लेकिन पुलिस ने अब तक केवल दो आरोपियों को पकड़कर खानापूर्ति की है।
माफिया का नेटवर्क
खदानों में वर्षों से कबाड़ी गिरोह सक्रिय हैं, पुलिस और प्रशासन ने इनके मुख्य सरगनाओं पर शिकंजा क्यों नहीं कसा?
जवान की मौत के बाद अब पुलिस हत्या की धाराएं (IPC 302/BNS) जोड़ने की बात कह रही है, जबकि हमला पहले दिन ही जानलेवा था।
सुरक्षा में सेंध
प्रतिबंधित खदान क्षेत्र में एक दर्जन हथियारबंद बदमाश कैसे घुस आए? क्या इसमें किसी अंदरूनी मिलीभगत की आशंका है?
जवानों का मनोबल
क्या सुरक्षा बल के जवानों की जान इतनी सस्ती है कि रद्दी कबाड़ के लिए उनकी हत्या कर दी जाए?
खदानों में ‘कबाड़ राज’: कागजी साबित हो रही सुरक्षा
सिंगरौली की खदानों में अरबों की संपत्ति खुले में पड़ी है, जो कबाड़ी माफिया के लिए ‘सोने की खान’ बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कबाड़ी गिरोहों को रसूखदार लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस उन पर हाथ डालने से कतराती है। सत्येन्द्र भारती की शहादत ने यह साबित कर दिया है कि यहाँ सुरक्षा इंतजाम केवल कागजों तक सीमित हैं।
अब कड़े प्रहार की जरूरत
एक जांबाज सिपाही ने देश की संपत्ति की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। अब जिम्मेदारी प्रशासन की है कि वह केवल छोटे गुर्गों को न पकड़े, बल्कि इस पूरे गिरोह के आकाओं को सलाखों के पीछे पहुँचाए। शहीद सत्येन्द्र भारती को शत-शत नमन।









