मुरैना जिले के तेज तर्रार कलेक्टर लोकेश जांगिड़ के सख्त निर्देशों के बावजूद जिला मुख्यालय पर पदस्थ आरआई एवं पटवारी तय समय के अनुसार अपने कार्यालय में नहीं मिलते और जिले की जनता उन्हें तलाशती फिरती रहती है । पटवारियों द्वारा हर काम के रेट फिक्स कर दिए गए हैं और जब तक भेंट पूजा नहीं होती, तब तक लोगों के काम लटकाए रहते हैं, जिससे जनता में इन सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध भारी आक्रोश है। सीमांकन एवं नामांतरण के नाम पर जिलेभर में आरआई एवं पटवारी आम जनता का जमकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं और बिना भेंट पूजा के कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कलेक्टर द्वारा जिले की कमान संभालने के पश्चात सभी पटवारी राजस्व अधिकारी आदि को सख्त निर्देश दिए गए थे कि वह सप्ताह में इतने दिन इतने घंटे अपने कार्यालय में उपस्थित रहेंगे और आम जनता के लंबित कार्यों का निराकरण करेंगे, लेकिन इस आदेश का उन पर कोई असर दिखाई नहीं देता । तहसील कार्यालय हो एसडीएम कार्यालय हो या कलेक्ट्रेट, उक्त राजस्व अधिकारी एवं पटवारी लोगों को लाख तलाशने पर भी नहीं मिलते हैं । इस समय फसल का सीजन है और किसानों के पास इतना समय नहीं कि वह बार-बार राजस्व अधिकारी व पटवारी को तलाशते फिरते रहें । बच्चों की नौकरी के काम काम में आने वाले नो ड्यूज फॉर्म पर साइन करवाने के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। बताया जाता है कि एसडीएम मुरैना द्वारा अपने चहेते पटवारियों को दो दो प्रभार थमा दिए गए हैं, लेकिन काम के मामले में वहां पर जीरो साबित हो रहे हैं । तहसील कार्यालय में सीमांकन एवं नामांतरण की फाइलें बड़ी संख्या में लंबित पड़ी हुई है, इसका कारण जिनकी फाइलें है, उनके द्वारा राजस्व अधिकारी एवं पटवारी को भेंट पूजा ना किया जाना है।
सूत्र बताते हैं कि जिला मुख्यालय पर छोदा,डोमपुरा, जौरा खुर्द,बड़ोखर क्षेत्र के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। इन क्षेत्रों के एवं राजस्व अधिकारी एवं पटवारी आम जनता का कार्य छोड़कर व्हीआईपी ड्यूटी के नाम पर गायब रहकर समर हाउस एवं रेस्ट हाउस पर नेताओं एवं अधिकारियों की चापलूसी में लगे रहते हैं,इसलिए इन पर कभी कोई कार्यवाही नहीं होती और हो भी जाए तो वह अपने आकाओं से मिलकर वापस अपने पद और ड्यूटी पर आ जाते हैं।
अधिकांश पटवारी खोलकर बैठे निजी कार्यालय, प्राइवेट लड़के कर रहे संचालित
बताया जाता है कि सरकारी राजस्व अधिकारी एवं पटवारियों द्वारा बिना किसी अनुमति के निजी कार्यालय खोल रखे हैं और उनमें प्राइवेट लड़के काम कर रहे हैं। सीमांकन नामांकन एवं अन्य कार्य के लिए आने वाले लोगों को यही लड़के डील करते हैं और भ्रष्टाचार की रकम भी तय कर लेते हैं। इस संबंध में कई बार समाचार प्रकाशित हुए लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे राजस्व अधिकारी एवं पटवारियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। कोई भी छोटा से छोटा कार्य क्यों ना हो, जब तक रिश्वत नहीं मिलती, तब तक लोगों के काम लटके रहते हैं और कहीं किसी नेता से सिफारिश करवा दी तो लोगों को इतना झमेला बता दिया जाता है कि सामने वाले का सिर चकरा जाता है।
एक माह में आधा सैकड़ा से अधिक राजस्व संबंधी प्रकरण हुए नामंजूर
सूत्र बताते हैं कि तहसीलदार कार्यालय में एक बाबू का इतना जलवा है कि वह जो कहता है वही तहसीलदार करते हैं । नामांतरण एवं अन्य राजस्व संबंधी आधा सैकड़ा से अधिक प्रकरण रिश्वत न मिलने के कारण नामंजूर कर दिए गए हैं । सीमांकन के नाम पर तहसील कार्यालय में 5 से लेकर 50 हजार तक की रिश्वत मांगी जाती है । राजस्व अधिकारी एवं पटवारी फोती के नामांतरण या अन्य कार्यों के लिए एसडीएम एवं तहसीलदार के नाम पर मोटी रकम लोगों से वसूल करते हैं और रिश्वत न देने पर लोगों को गुमराह कर चक्कर लगवाते रहते हैं । इस तरह आम जनता का जमकर आर्थिक शोषण हो रहा है ।
वर्ष 2020 का रिकॉर्ड जिला रिकॉर्ड रूम में नहीं कराया जमा, लोग हो रहे परेशान
सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2020 में जो बाबू तहसील और सर्किलों पर पदस्थ हुए थे । उनके द्वारा आज दिनांक तक जिले में उस समय का रिकॉर्ड जमा नहीं किया गया है, जिससे संबंधित व्यक्तियों को नकल प्राप्त करने में परेशानी हो रही है और उस पर तहसील में पदस्थ दो चपरासी अपनी नजर लगाए रहते हैं। काफी परेशानियों के बाद लोगों को नकल प्राप्त हो पाती है। वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि वह रिकॉर्ड जिला रिकॉर्ड रूम में जमा करवाएं और दोनों चपरासियों को तहसील के कार्य में लगाने को निर्देशित करें ।








