नई दिल्ली/बरेली। दिल्ली से लेकर उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश तक इस मुद्दे पर विरोध की आवाज़ें उठने लगी हैं क्योंकि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर ‘सवर्ण बनाम सिस्टम’ की जंग तेज हो गई है। प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने इस विवाद में कूदते हुए सरकार पर कड़ा तंज कसा है। वहीं, यूपी के बरेली में एक पीसीएस (PCS) अधिकारी ने इन नियमों के विरोध में अपना पद त्याग कर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने मोर्चा खोल दिया है।
कुमार विश्वास का तंज: “रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा”
डॉ. कुमार विश्वास ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर दिवंगत कवि स्व० रमेश रंजन की कुछ तीखी पंक्तियां साझा कीं। इन पंक्तियों के जरिए उन्होंने यूजीसी के नए नियमों से ‘सवर्ण समाज’ में उपजे असंतोष और दर्द को आवाज दी है:
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…।”
विश्वास की यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसे सवर्णों के प्रति भेदभाव के रूप में देखा जा रहा है।
इस्तीफा और धरना: बरेली में हड़कंप
यह विवाद केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। बरेली के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है।
विरोध का तरीका
इस्तीफा देने के बाद अग्निहोत्री मंगलवार को बरेली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
उनका कहना है कि नए नियम मेधावी और सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।
क्या है विवाद की जड़?
यूजीसी द्वारा प्रस्तावित ‘समता नियमों’ (Equity Regulations) को लेकर सवर्ण समाज का मानना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के अवसरों को कम करेंगे।
सवर्णों का पक्ष
नियमों को भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है।
सरकार का रुख
बढ़ते विरोध और आंदोलन की आहट को देखते हुए केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय अब ‘डैमेज कंट्रोल’ में जुट गए हैं। सूत्रों के अनुसार, बीच का रास्ता निकालने के लिए गहन मंथन शुरू हो गया है।
सुलगता हुआ सामाजिक मुद्दा
एक पीसीएस अधिकारी का इस्तीफा और कुमार विश्वास जैसी हस्तियों का मुखर होना यह संकेत देता है कि यह मामला आने वाले समय में चुनावी राज्यों और केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।








