खंडवा। मध्य प्रदेश के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का खंडवा में हुआ अल्पकालिक प्रवास स्थानीय राजनीति में नई चर्चाएं छेड़ गया है। खंडवा जंक्शन पर हुए भव्य स्वागत से लेकर सर्किट हाउस में हुए ‘बंद कमरा मंथन’ तक, इस दौरे के हर कदम को आगामी विधानसभा और संगठन की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
शक्ति प्रदर्शन: जंक्शन पर एकजुट दिखा संगठन
मंत्री परमार के आगमन पर खंडवा विधायक कंचन मुकेश तंवे के नेतृत्व में हुए जोरदार स्वागत ने भाजपा की आंतरिक एकजुटता का संदेश दिया इस दौरान जिला महामंत्री धर्मेंद्र बजाज, पूर्व जिला अध्यक्ष सेवादार जी पटेल सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि स्थानीय संगठन पूरी तरह सक्रिय है।
राजनीतिक गलियारों में इस स्वागत को विधायक कंचन तंवे के बढ़ते कद और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ के रूप में देखा जा रहा है।
सर्किट हाउस में ‘शिक्षा और व्यवस्था’ पर मंथन
सर्किट हाउस में ठहरने के दौरान मंत्री ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ गंभीर चर्चा की।
नई सौगातें
सूत्रों की मानें तो खंडवा को उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नए कॉलेज या कोर्सेज की सौगात मिल सकती है।
प्रशासनिक फीडबैक
मंत्री ने जिले की प्रशासनिक स्थिति और शासकीय संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी फीडबैक लिया। विधायक तंवे द्वारा स्थानीय मुद्दों की पैरवी ने यह स्पष्ट किया कि सरकार अब मैदानी फीडबैक को प्राथमिकता दे रही है।
UGC विवाद पर सवाल, मंत्री का ‘धार्मिक’ जवाब
पूरे दौरे में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब पत्रकारों ने देश भर में सुलग रहे यूजीसी (UGC) की नई शिक्षा नीति और विवादित नियमों पर सवाल किया।
मंत्री इंदर सिंह परमार ने इस नीतिगत विवाद पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया।
उन्होंने मुस्कुराते हुए सवाल को टाल दिया और कहा— “मैं फिलहाल नर्मदा स्नान करने और दर्शन करने आया हूँ।” विद्वानों का मानना है कि यूजीसी के नए नियमों पर सवर्ण समाज और बुद्धिजीवियों के विरोध को देखते हुए मंत्री ने फिलहाल विवादों से दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझा।
ओंकारेश्वर रवानगी और भविष्य की संभावनाएं
सर्किट हाउस में विश्राम के बाद मंत्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए रवाना हो गए। हालांकि, उनका यह संक्षिप्त दौरा खंडवा के लिए कई संभावनाएं छोड़ गया है:
क्या खंडवा को तकनीकी शिक्षा का नया केंद्र बनाया जाएगा?
विधायक और मंत्री के बीच का तालमेल क्या जिले के रुके हुए विकास कार्यों में तेजी लाएगा?
इंदर सिंह परमार का यह दौरा भले ही धार्मिक बताया गया हो, लेकिन इसमें शिक्षा, संगठन और भविष्य की राजनीति का गहरा पुट था। यूजीसी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साधना यह संकेत देता है कि सरकार फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है।








