सिंगरौली: ऊर्जाधानी के नाम से विख्यात सिंगरौली जिले की कार्यप्रणाली और यहाँ के विशाल औद्योगिक ढांचे को समझने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 7 नव-प्रशिक्षित अधिकारी जिले के भ्रमण पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कलेक्टर गौरव बैनल से मुलाकात की और जिले की भौगोलिक, आर्थिक और प्रशासनिक बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की।
माइनिंग सेक्टर: जिले की आर्थिक रीढ़
कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान कलेक्टर गौरव बैनल ने युवा अधिकारियों को बताया कि सिंगरौली की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से माइनिंग सेक्टर पर टिकी है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
- जिले में संचालित कोल परियोजनाओं और कोयला उत्खनन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।
- थर्मल पावर प्लांटों की कार्यप्रणाली और देश की बिजली आपूर्ति में सिंगरौली के योगदान को समझाया।
- माइनिंग से जुड़े परिवहन (Logistics), लेबर इंडस्ट्री और पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने अनुभव साझा किए।
कोल माइन्स और NTPC का किया भ्रमण

बैठक के बाद प्रशिक्षु अधिकारियों ने जिले के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का फील्ड विजिट किया। उन्होंने कोल परियोजनाओं के साथ-साथ एनटीपीसी (NTPC) और अन्य ऊर्जा उत्पादन कंपनियों का भ्रमण कर यह जाना कि जमीन स्तर पर कोयले से बिजली बनाने तक की प्रक्रिया कैसे काम करती है। अधिकारियों ने ‘ओपन कास्ट माइनिंग’ और विस्थापन व पुनर्वास (R&R) की नीतियों को भी बारीकी से समझा।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ इस संवाद सत्र के दौरान जिले के संजीव पाण्डेय (संयुक्त कलेक्टर), माइकेल तिर्की (डिप्टी कलेक्टर),सुरेश जाधव (एसडीएम), आकांक्षा पटेल (खनिज अधिकारी) अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने विभागों के कार्यों की जानकारी साझा कीl
नए आईएएस अधिकारियों के लिए सिंगरौली जिला एक बेहतरीन लर्निंग ग्राउंड साबित हो रहा है। यहाँ की माइनिंग चुनौतियां और मेगा पावर प्रोजेक्ट्स उन्हें भविष्य में जटिल प्रशासनिक स्थितियों को संभालने के लिए तैयार करेंगे। कलेक्टर गौरव बैनल के मार्गदर्शन में यह भ्रमण अधिकारियों के लिए काफी ज्ञानवर्धक रहा।








