खंडवा (जावर)। “सरकार हथेली पर चांद दिखा रही है, लेकिन हकीकत में किसानों के खेत आज भी प्यासे हैं।” यह तीखा हमला जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष ठाकुर उत्तमपाल सिंह ने खंडवा की बहुचर्चित जावर-सिहाड़ा उद्वहन सिंचाई योजना पर बोला है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में आक्रोशित किसानों ने जावर थाने पहुंचकर राज्यपाल और लोकायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा और करोड़ों रुपये की इस योजना में हुए कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
2017 से 2024: वादे पूरे हुए पर पानी नहीं पहुँचा
वर्ष 2017 में जब इस 550 करोड़ रुपये की योजना का शिलान्यास हुआ था, तब दावा किया गया था कि सिहाड़ा और जावर ब्लॉक के लगभग 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की प्यास बुझेगी। लेकिन 7 साल बीत जाने के बाद भी खेतों तक पानी की एक बूंद नहीं पहुँची है।
किसानों के गंभीर आरोप
अधूरा कार्य
योजना का काम जी.वी.पी.आर. (GVPR) कंपनी को दिया गया था। कार्य अवधि 2021 से 2024 तय थी, लेकिन कंपनी काम अधूरा छोड़कर चली गई।
अधिकारी-ठेकेदार मिलीभगत
आरोप है कि जिम्मेदार इंजीनियरों और पेटी कॉन्ट्रैक्टरों ने मिलीभगत कर कागजों पर काम पूरा दिखाया और करोड़ों रुपये का भुगतान उठा लिया।
भ्रष्टाचार की पाइपलाइन
किसानों का कहना है कि डाली गई पाइपलाइन और बुनियादी ढांचा मानक स्तर का नहीं है, जिससे योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ रही है।
गांव-गांव से उमड़ा जनसैलाब: थाने में सौंपा ज्ञापन
चंदन सिंह राजपूत और ब्रजेश सिंह पवार के नेतृत्व में भकराड़ा, खेड़ी, पिपलिया फूल, ढोरानी, खुटफल और बमनगांव जैसे दर्जनों गांवों के किसान लामबंद हुए। किसानों ने सामूहिक रूप से मांग की है कि:
- संबंधित कंपनी और ठेकेदारों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज हो।
- भ्रष्ट अधिकारियों और इंजीनियरों की संपत्ति की जांच हो।
- योजना को समयबद्ध तरीके से पुनर्जीवित कर पानी खेतों तक पहुँचाया जाए।
ठाकुर उत्तमपाल सिंह का वार: “कागजों में अरमानों को सुखा दिया”
कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष ठाकुर उत्तमपाल सिंह ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि यह योजना किसानों की आखिरी उम्मीद थी, लेकिन इसे भ्रष्टाचार ने लील लिया। उन्होंने कहा, “550 करोड़ की भारी-भरकम राशि कहाँ गई? सरकार को इसका जवाब देना होगा। कागजों में योजना पूरी दिखाकर किसानों के सपनों का गला घोंटा गया है।”
चेतावनी: न्याय नहीं मिला तो होगा उग्र आंदोलन
ज्ञापन सौंपने के दौरान रामपाल सिंह केहलारी, सुनील आर्य, अनिल जाधव, अश्विन बादल और युवा कांग्रेस के पदाधिकारी सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे। किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र दोषियों पर कार्रवाई और पानी की व्यवस्था नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
जावर-सिहाड़ा सिंचाई योजना मध्य प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी और कथित भ्रष्टाचार का नया प्रतीक बन गई है। 550 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अगर खेत प्यासे हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता है। अब देखना होगा कि लोकायुक्त और राज्यपाल इस ज्ञापन पर क्या संज्ञान लेते हैं।








