केंद्र और राज्य सरकार भले ही ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘कायाकल्प’ जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हो, लेकिन सिंगरौली जिले के करामी गांव से आई तस्वीरें दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। यहाँ का उप स्वास्थ्य केन्द्र और उससे सटा आंगनवाड़ी केन्द्र बुनियादी सुविधाओं के लिए खून के आंसू रो रहा है। हालत यह है कि जिस शौचालय को सम्मान का प्रतीक माना जाता है, वहां दरवाजा तक नहीं है और महिलाएं बांस की बल्लियों के पीछे अपनी मर्यादा बचाने को मजबूर हैं।
20 गांवों का बोझ, पर सुविधा के नाम पर ‘शून्य’
करामी उप स्वास्थ्य केन्द्र केवल एक गांव नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 20 गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं की धुरी है। यहाँ हर दिन दर्जनों महिलाएं टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच और सामान्य उपचार के लिए पहुँचती हैं।
बदहाली के मुख्य बिंदु
- शौचालय में गेट नहीं है, जिसे ढंकने के लिए बांस की बल्लियों का जुगाड़ किया गया है।
- पानी के लिए कोई नल नहीं लगा है और टाइल्स का काम भी अधूरा छोड़कर ठेकेदार रफूचक्कर हो गया है।
- बगल में स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र, जहाँ भविष्य के नौनिहाल शिक्षा और पोषण पाते हैं, वह भी इसी टूटे-फूटे शौचालय पर निर्भर है। भवन की जर्जर स्थिति बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
विधायक के दौरों के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
स्थानीय ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि देवसर विधायक के कई दौरे इस क्षेत्र में हुए, लेकिन उप स्वास्थ्य केन्द्र की इस दयनीय स्थिति पर उनकी नजर नहीं पड़ी।
ग्रामीण ने बताया कि “जब अस्पताल में ही साफ-सफाई और पानी नहीं होगा, तो वहां बीमार का इलाज कैसे होगा? टीकाकरण के लिए आने वाली गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे यहाँ आकर और बीमार पड़ सकते हैं।
स्वच्छता अभियान को लगा पलीता
भारत सरकार शौचालय निर्माण और खुले में शौच से मुक्ति (ODF) पर विशेष जोर देती है, लेकिन सरकारी संस्थाओं में ही शौचालय का यह हाल विभाग की गंभीरता को उजागर करता है। अधूरी टाइल्स और पानी की अनुपलब्धता यह संकेत देती है कि निर्माण कार्य में भी बड़ी अनियमितताएं बरती गई हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
करामी की जनता ने अब सीधे जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि:
- उप स्वास्थ्य केन्द्र और आंगनवाड़ी भवन की तुरंत मरम्मत करवाई जाए।
- शौचालय में गेट और पानी के नल की स्थाई व्यवस्था हो।
- आंगनवाड़ी के जर्जर भवन को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाया जाए।
सिंगरौली का यह मामला प्रशासनिक अनदेखी का एक क्लासिक उदाहरण है। जब तक स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों में सुधार नहीं होगा, तब तक विकास के दावों का कोई मोल नहीं है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस खबर के बाद करामी की महिलाओं और बच्चों को एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण दे पाता है या नहीं।








