खंडवा: जिले की ग्राम पंचायत पगार में विकास कार्यों को लेकर भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। पंचायत की कार्यप्रणाली से त्रस्त ग्रामीणों ने अब सीधे कलेक्टर का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव की मनमानी के चलते पंचायत में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं और स्वीकृत योजनाओं का लाभ पात्र लोगों के बजाय अपात्रों को दिया जा रहा है।
स्थल निरीक्षण के 18 दिन बाद भी ढाक के तीन पात
शिकायत के अनुसार, ग्रामीणों के दबाव के बाद संबंधित विभाग ने 12 दिसंबर 2025 को गांव में स्थल निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने उस वक्त आश्वासन दिया था कि काम जल्द शुरू होगा, लेकिन आज 30 दिसंबर 2025 तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के निरीक्षण के बावजूद धरातल पर एक ईंट भी नहीं रखी गई है।
कागजों में पूरा हुआ काम, मौके पर झाड़ियां
ग्रामीणों ने शिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कई ऐसे कार्य हैं जिन्हें सरकारी दस्तावेजों और पोर्टल पर ‘पूर्ण’ दर्शा दिया गया है, जबकि मौके पर कोई निर्माण हुआ ही नहीं, साथ ही सामग्री खरीद और भुगतान की प्रक्रियाओं में भारी लापरवाही बरती जा रही है। वहीं पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से काटकर अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
“आंदोलन को मजबूर होंगे ग्रामीण”
पंचायत के चक्कर काटकर थक चुके ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे पत्र में मांग की है कि पगार पंचायत के सभी वित्तीय लेन-देन और अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही दोषी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय पर उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
प्रशासनिक चुप्पी और बढ़ता रोष
फिलहाल इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन, 30 दिसंबर तक कार्रवाई न होने से ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अब सबकी नजरें कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या वे इस ‘कागजी विकास’ की पोल खोलेंगे?








