शासन और प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच जब एक गरीब आदिवासी न्याय की गुहार लगाने पहुंचता है, तो अक्सर उसे ‘सुरक्षा’ और ‘प्रोटोकॉल’ की दीवारों का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ सिंगरौली कलेक्ट्रेट में देखने को मिला, जहां ग्राम गोभा निवासी श्री लालजी बैगा घंटों तक प्रभारी मंत्री संपत्तिया उईके (Sampatiya Uikey) का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें न तो मुलाकात का मौका मिला और न ही समस्या का समाधान, और अंत में उन्हें मायूस होकर घर वापस लौटना पड़ा।
घंटों इंतजार, फिर भी खाली हाथ
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम प्रभारी मंत्री संपत्तिया उईके (Sampatiya Uikey) जिले के दौरे पर सिंगरौली कलेक्ट्रेट आई थीं। इसी दौरान पीड़ित श्री लालजी बैगा अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, ताकि वे मंत्री के सामने अपनी व्यथा को रख सकें। श्री लालजी ने बताया कि वह शाम 5 बजे से लेकर रात 8 बजे तक कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहे, लेकिन वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें मंत्री से मिलने नहीं दिया। उन्होंने बताया कि “मेरी एक ही जिद थी— प्रभारी मंत्री को अपनी चोटें दिखाना और वन विभाग के कर्मी की प्रताड़ना की कहानी सुनाना, लेकिन उन्होंने मेरी बात सुनने का मौका ही नहीं दिया।”पीड़ित ने कहा कि अब वे पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और राष्ट्रपति भवन तक अपनी गुहार पहुंचाने का मन बना लिया हैं, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला है।
9 दिसंबर को हुई थी कथित मारपीट की घटना
गौरतलब है कि यह पूरा मामला 9 दिसंबर का है, जब लालजी बैगा जंगल की अपने पुश्तैनी भूमि पर खेती कर रहे थे। इस दौरान वन विभाग के कर्मचारी सुनील कुमार बुनकर ने उन्हें खेती करने से मना किया और कथित रूप से वन चौकी ले जाकर कमरे में बंद कर उनकी जमकर पिटाई की। इस घटना में पीड़ित का एक हाथ टूट गया जबकि शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं। घटना के बाद से बैगा समुदाय लगातार थानों और दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है।
कांग्रेस नेताओं ने की थी एफआईआर की मांग
घटना के बाद 18 दिसंबर को मामला सार्वजनिक हुआ, जिसके बाद कांग्रेस नेताओं और जिला पंचायत सदस्यों ने 19 दिसंबर को गोभा चौकी पर जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान आरोपी वनकर्मी नशे की हालत में चौकी पहुंच गया, जिसे पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था में लेते हुए अन्दर कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को प्रशासन की लापरवाही बताया और कहा कि आदिवासी समाज के व्यक्ति के साथ हुई अन्यायपूर्ण घटना पर अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
विभागों के अधिकारी दे रहे अलग-अलग बयान
घटना के संबंध में वन विभाग के एसडीओ एन.के. त्रिपाठी ने मारपीट की घटना से पूरी तरह इनकार किया है।
वहीं, सीएसपी पी.एस. परस्ते ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे विवाद में अब तक पुलिस और प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है, जबकि पीड़ित लगातार यह दावा कर रहा है कि उसे न्याय नहीं मिल पा रहा है।








