मुरैना/पहाड़गढ़: चंबल अंचल में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताजा उदाहरण मुरैना (Morena) जिले के पहाड़गढ़ ब्लॉक की सुखपुरा पंचायत में देखने को मिल रहा है। यहाँ सीसी सड़क निर्माण के नाम पर 10 लाख रुपये के सरकारी बजट को ‘साफ’ कर दिया गया, लेकिन जांच में गबन की पुष्टि होने के 90 दिन बाद भी जिला प्रशासन मौन है। अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी अब सीधे तौर पर प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।
काम शून्य, भुगतान 10 लाख
मामला सितंबर माह का है, जब सुखपुरा पंचायत के सरपंच और सचिव अनार सिंह ने बघेल के पुरा में सीसी सड़क निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने से 10 लाख रुपये की राशि आहरित कर ली। शिकायत जब ग्रामीणों ने की, तो पहाड़गढ़ जनपद सीईओ महावीर सिंह ने मौके पर जांच टीम भेजी। टीम को मौके पर सड़क का नामोनिशान नहीं मिला। टीम ने गबन की पुष्टि करते हुए विस्तृत जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत सीईओ को भेज दिया।
कार्रवाई से बचने के लिए रातों-रात बदली ‘सड़क की लोकेशन’
सूत्रों के अनुसार, जब सरपंच और सचिव को लगा कि वे बुरी तरह फंस चुके हैं, तो उन्होंने एक और नियम विरुद्ध कदम उठाया। जांच शुरू होने के बाद आनन-फानन में उस सड़क को बघेल के पुरा के बजाय किसी अन्य स्थान पर बनवा दिया। जानकारों का कहना है कि नियमों के मुताबिक जिस कार्य का कार्यादेश जहाँ के लिए जारी हुआ है, उसे वहीं बनाना अनिवार्य है। स्थान बदलकर निर्माण करना भी वित्तीय अनियमितता और नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

“जांच कराकर कार्रवाई करेंगे”— जिला सीईओ का रटा-रटाया जवाब
जांच रिपोर्ट को जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन कार्रवाई की फाइल फाइलों में दबी है।
जनपद सीईओ का कहना है कि “हमने अपना काम कर दिया है, प्रतिवेदन जिला सीईओ को भेजा जा चुका है।”
जिला पंचायत सीईओ कमलेश भार्गव का इस गंभीर मामले पर अब भी वही पुराना जवाब है— “जांच कराकर कार्यवाही करेंगे।”
सवाल जो प्रशासन को चुभेंगे
- जब जांच टीम गबन की पुष्टि कर चुकी है, तो दोबारा किस जांच का इंतजार हो रहा है?
- क्या तीन महीने का समय दोषियों को बचाने या साक्ष्य मिटाने के लिए दिया गया है?
- भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली सरकार में 10 लाख का गबन छोटी बात है?








