मुरैना। मुरैना जिले के जौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत राजाराम का पुरा गांव में दबंगई और हिंसा का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। खेत में गाय चराने और भूसा लेने जैसी मामूली बात पर हुए विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। आरोप है कि गांव के दबंगों ने एक दलित परिवार पर लाठी-डंडों से हमला किया और दहशत फैलाने के लिए करीब 8 से 10 राउंड फायरिंग की। इस हमले में एक ही परिवार के 5 लोग लहूलुहान हो गए हैं।
माफी के बाद भी नहीं पसीजा दिल
पीड़ित रमेश जाटव के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे बनवारी गुर्जर, विश्राम, दामोदर, बंटी और वीरा गुर्जर अपने साथ करीब एक दर्जन हथियारबंद लोगों को लेकर पहुंचे और विवाद की शुरुआत तब हुई जब खेत में गाय चराने और भूसा लेने को लेकर मना किया गया। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने हाथ-पैर जोड़कर माफी भी मांगी, लेकिन दबंगों ने उनकी एक न सुनी और लाठी-डंडों से पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने कट्टे और बंदूकों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर गांव में दहशत फैला दी। इस हमले में रमेश जाटव, महराज जाटव, बहादुर, महादेवी सिमला और धीरत जाटव गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: 8 घंटे तक भटकता रहा परिवार
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद वे दोपहर करीब 1 बजे जौरा थाना पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत नहीं सुनी। इसके बाद वे अजाक थाना मुरैना पहुंचे, जहां से उन्हें फिर जौरा थाना भेज दिया गया। रात करीब 9 बजे तक पीड़ित घायल अवस्था में थाने के बाहर बैठे रहे। काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। दिनदहाड़े फायरिंग जैसी गंभीर वारदात के बावजूद एफआईआर में हुई इस देरी ने पुलिसिया संवेदनशीलता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
गांव में तनाव, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
फायरिंग और हमले के बाद राजाराम का पुरा गांव में भारी तनाव और भय का माहौल है। दलित समाज के लोगों ने प्रशासन से आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
मुरैना में हुई यह घटना एक बार फिर ग्रामीण अंचलों में जातिगत वैमनस्य और हथियारों के अवैध इस्तेमाल को उजागर करती है। पीड़ित परिवार के साथ पुलिस का व्यवहार इस बात का प्रमाण है कि आज भी न्याय के लिए गरीब तबके को संघर्ष करना पड़ता है।








