ग्वालियर/मुरैना: मध्य प्रदेश में साइबर ठगों (mp scam) के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे सीधे प्रशासनिक अधिकारियों को अपना शिकार बना रहे हैं। ताजा मामला ग्वालियर का है, जहां मुरैना के सबलगढ़ में पदस्थ रहे डिप्टी कलेक्टर (SDM) अरविंद सिंह माहौर से साइबर ठगों ने सीएम ऑफिस (CM Office) का कर्मचारी बनकर करीब 2.95 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने इस वारदात को इतनी चतुराई से अंजाम दिया कि उन्होंने पीड़ित को झांसे में लेने के लिए जिले के कलेक्टर (Collector) के नाम का भी इस्तेमाल किया।
‘कलेक्टर’ (Collector) के रेफरेंस से जाल में फंसाया
पीड़ित डिप्टी कलेक्टर अरविंद सिंह माहौर (निवासी न्यू अशोक कॉलोनी, थाटीपुर) ने पुलिस को बताया कि ठगी की शुरुआत 19 सितंबर 2025 को हुई। ठग ने पहले डिप्टी कलेक्टर को कॉल किया, जो उन्होंने नहीं उठाया। इसके बाद ठग ने शातिर दिमाग लगाते हुए जिले के कलेक्टर को फोन किया और खुद को ‘सीएम पोर्टल ऑफिस’ से बताया। ठग ने शिकायत की कि डिप्टी कलेक्टर कॉल रिसीव नहीं कर रहे हैं। जब कलेक्टर ने डिप्टी कलेक्टर को बात करने के लिए कहा, तो उन्होंने दूसरे नंबर से आए कॉल को रिसीव कर लिया। ट्रूकॉलर पर यह नंबर “सीएम पोर्टल अश्विनी” के नाम से दिख रहा था। कलेक्टर का संदर्भ होने के कारण अधिकारी को कोई संदेह नहीं हुआ।
सजा कम कराने के नाम पर मांगे ‘योगदान’
ठग ने खुद को सीएम ऑफिस का कर्मचारी बताते हुए डिप्टी कलेक्टर से कहा कि उनकी एक विभागीय जांच चल रही है। जांच में सजा कम कराने और मामला सुलझाने के लिए कुछ राशि “योगदान” के रूप में जमा करनी होगी। अधिकारी उसकी बातों में आ गए और 19 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच अलग-अलग किश्तों में ऑनलाइन वॉलेट और बैंक खातों के जरिए 2.95 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ऐसे खुला ठगी (scam)का राज
जब आरोपी लगातार और पैसों की मांग करने लगा, तो डिप्टी कलेक्टर को शक हुआ। उन्होंने अपने स्तर पर पड़ताल की तो पता चला कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) में अश्विनी नाम का कोई व्यक्ति इस तरह के काम के लिए पदस्थ ही नहीं है। ठगी का अहसास होते ही उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की।
ई-जीरो एफआईआर दर्ज, जांच शुरू
इस मामले में ई-जीरो एफआईआर (E-Zero FIR) दर्ज की गई है। शिकायत सीसीटीएनएस के माध्यम से ग्वालियर के थाटीपुर थाने पहुंची, जहां अब औपचारिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
एएसपी अनु बेनीवाल ने बताया कि प्रदेश में चल रहे ई-जीरो एफआईआर अभियान के तहत यह मामला दर्ज किया गया है। एक शासकीय अधिकारी को डराकर और खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर ठगी की गई है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों के बैंक खातों और लोकेशन का पता लगाया जा रहा है।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
यह घटना साबित करती है कि ठग अब ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों के मनोविज्ञान के साथ खेल रहे हैं।
- कोई भी सरकारी विभाग फोन पर पैसों की मांग नहीं करता।
- ठग अक्सर ट्रूकॉलर पर फर्जी नाम (जैसे CM Office, Police HQ) सेट कर लेते हैं।
- विभागीय जांच या गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगने वालों की तुरंत शिकायत करें।








