भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वन विभाग के आला अफसरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी ‘प्रशासनिक सर्जरी’ की है। बुधवार देर शाम जारी एक आदेश में भारतीय वन सेवा (IFS) के 28 अधिकारियों का फेरबदल किया गया। इस सर्जरी का मुख्य केंद्र प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व और सेंचुरी रहे, जहाँ हाल के दिनों में बाघों की मौत और अन्य अनियमितताओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी।
सीएम की बैठक और फिर ‘एक्शन’
यह तबादला सूची मुख्यमंत्री मोहन यादव की उस महत्वपूर्ण बैठक के चंद घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर बनाने और पर्यटन को बढ़ावा देने पर मंथन किया था। बैठक में बाघों की लगातार हो रही मौत पर सीएम ने कड़ी नाराजगी जताई थी, जिसके बाद देर शाम यह बड़ी सूची जारी कर दी गई।
इन दिग्गजों के बदले गए कार्यक्षेत्र:
अमित कुमार दुबे भा. व. से. 2001 (APCCF) को संजय टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के बाद उन पर गाज गिरी है। उन्हें मैदानी जिम्मेदारी से हटाकर पीसीसीएफ ऑफिस (मुख्यालय) में पदस्थ किया गया है।
विभाष ठाकुर भा. व. से. 2001 (PCCF) को लघु वनोपज संघ से हटाए जाने के बाद अब उन्हें अनुसंधान शाखा (Research Wing) जैसी ‘लूप लाइन’ मानी जाने वाली शाखा में भेज दिया गया है। गौरतलब है कि ठाकुर ने नर्मदापुरम में अवैध वन कटाई उजागर कर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी थीं।
प्रमुख रिजर्व के अधिकारी
कान्हा, पेंच और नौरादेही जैसे महत्वपूर्ण अभयारण्यों के प्रभारियों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। इन क्षेत्रों में अब नई ऊर्जा के साथ अधिकारियों को पदस्थ किया गया है।
तबादलों के पीछे के 3 बड़े कारण:
बाघों की सुरक्षा में चूक
संजय टाइगर रिजर्व सहित अन्य क्षेत्रों में बाघों की मौत को शासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है।
अवैध कटाई पर सख्ती
वन संपदा की चोरी और अवैध कटाई रोकने में नाकाम रहे अफसरों को फील्ड से हटाकर मुख्यालय भेजा गया है।
पर्यटन कॉरिडोर की तैयारी
सीएम की मंशा के अनुरूप अब ऐसे अफसरों को कमान सौंपी गई है जो टाइगर रिजर्व को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर सकें।
वन विभाग में हुई यह उथल-पुथल स्पष्ट संकेत है कि मोहन यादव सरकार वन्यजीव संरक्षण और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं है। ‘लूप लाइन’ में भेजे गए अफसरों की संख्या यह बताती है कि आने वाले दिनों में फील्ड पोस्टिंग के लिए और भी कड़े मापदंड तय किए जाएंगे।









