MP Transfer : मध्यप्रदेश वन विभाग में बुधवार को हुई प्रशासनिक सर्जरी केवल भारतीय वन सेवा (IFS) तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि सरकार ने राज्य वन सेवा (SFS) के अधिकारियों को भी बड़े पैमाने पर इधर से उधर किया है।
इस फेरबदल से राज्य वन विकास निगम, विभिन्न वन वृत्तों और DFO (संभागीय वन अधिकारी) स्तर पर व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव
निगम के भीतर कई महत्वपूर्ण पदों पर नए अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि वन विकास की योजनाओं में गति लाई जा सके।
विभाग ने प्रवर श्रेणी वेतनमान में कार्यरत 20 अनुभवी अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी है। इन अधिकारियों की भूमिका मैदानी स्तर पर वन सुरक्षा और प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वनों के दीर्घकालिक प्रबंधन और कटाई/संरक्षण की योजना बनाने वाली इकाइयों में भी नए अफसरों को पदस्थ किया गया है।
इन बदलावों का क्या होगा असर?
डीएफओ और वन वृत्त स्तर पर अधिकारियों के बदलने से वन संपदा की चोरी और अवैध कटाई पर अंकुश लगाने की रणनीति बदलेगी।
मुख्यालय से लेकर मैदानी अमले तक एक साथ हुए इन तबादलों से विभागीय तालमेल को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।
मुरैना, ग्वालियर, सिंगरौली जैसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में नई पदस्थापनाओं से अवैध उत्खनन और वन्यजीव सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने में नई ऊर्जा मिलने की संभावना है।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वन प्रबंधन में किसी भी स्तर पर सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। IFS के साथ-साथ SFS अधिकारियों के तबादले यह सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं कि पूरी ‘चेन ऑफ कमांड’ मुख्यमंत्री की नई प्राथमिकताओं (जैसे टाइगर कॉरिडोर और पर्यटन) के अनुरूप काम कर सके।
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