सिंगरौली (खुटार)। देश के मान-सम्मान के प्रतीक राष्ट्रध्वज तिरंगे के अपमान का एक दुखद मामला सिंगरौली जिले से सामने आया है। खुटार स्थित शासकीय प्राथमिक पाठशाला (पूर्व टोला) में राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर फटा हुआ तिरंगा झंडा फहरा दिया गया। इस गंभीर लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
तर्क ऐसा कि सुनकर सिर पकड़ लें: “फंड नहीं आता”
जब ग्रामीणों ने फटे हुए तिरंगे को लेकर आपत्ति जताई, तो स्कूल के शिक्षक रेवतीरमण ने ऐसी सफाई दी जो और भी ज्यादा चौंकाने वाली है।
बहाना: शिक्षक का कहना है कि स्कूल में कोई ‘फंड’ नहीं आता है, इसलिए नया झंडा नहीं खरीदा जा सका।
बड़ा सवाल: क्या चंद रुपयों का फंड देश की आन-बान-शान तिरंगे से ऊपर है? क्या शिक्षक और विद्यालय प्रबंधन इतने असमर्थ थे कि राष्ट्रीय सम्मान के लिए एक साबुत झंडे का प्रबंध नहीं कर सके?
कानून की नज़र में बड़ा अपराध
भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) के अनुसार:
फटा झंडा प्रतिबंधित
क्षतिग्रस्त, फटा या मैला तिरंगा फहराना न केवल वर्जित है, बल्कि यह प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 के तहत दंडनीय अपराध है।
संवेदनहीनता
सरकारी स्कूल जैसे जिम्मेदार संस्थान में ऐसी चूक यह दर्शाती है कि वहां राष्ट्र के गौरव के प्रति कितनी उदासीनता है।

प्रशासनिक एक्शन: जांच और कार्रवाई का आश्वासन
मामला तूल पकड़ते ही शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने मोर्चा संभाला है:
DEO एसबी सिंह ने पुष्टि की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ला ने बताया कि इस लापरवाही पर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा गया है और जांच के आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जनता का आक्रोश: केवल सस्पेंशन काफी नहीं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि देश के अपमान का मामला है। लोगों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ ऐसा खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।








