ओंकारेश्वर। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद अब पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में भी जल प्रदूषण का मामला गरमा गया है। हजारों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र मां नर्मदा में मिल रहे गंदे सीवरेज के पानी को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। खंडवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं मांधाता के पूर्व प्रत्याशी उत्तमपाल सिंह पुरनी ने कार्यकर्ताओं के साथ नगर का दौरा कर प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है।
‘पवित्र जल’ में घुल रहा ‘शहर का जहर’
दौरे के दौरान उत्तमपाल सिंह पुरनी ने ब्रह्मपुरी, गोमुख घाट और ममलेश्वर जैसे प्रमुख क्षेत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि नगर का सीवरेज और गंदा पानी बिना किसी शुद्धिकरण के सीधे मां नर्मदा की मुख्य धारा में मिल रहा है।
हर दिन हजारों श्रद्धालु इसी घाट पर स्नान करते हैं और नर्मदा जल को पवित्र मानकर उसका आचमन (पीना) करते हैं। दूषित जल के मिलने से महामारी फैलने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) अपनी क्षमता से कम काम कर रहा है और दिन में केवल दो घंटे ही संचालित किया जाता है।
कांग्रेस की मांग: “रूट डायवर्ट करो या झेलो आंदोलन”
उत्तमपाल सिंह पुरनी ने कलेक्टर और एसडीएम से फोन पर चर्चा कर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
रूट डायवर्जन
सीवरेज के उन सभी रास्तों को तत्काल बंद किया जाए जो सीधे नर्मदा में खुलते हैं।
प्लांट का संचालन
ट्रीटमेंट प्लांट को उसकी पूरी क्षमता के साथ नियमित रूप से चलाया जाए।
निगरानी
सभी ड्रेनेज आउटलेट्स पर प्रशासन की सतत निगरानी हो।
“इंदौर जैसी त्रासदी ओंकारेश्वर में न हो, इसके लिए प्रशासन को अभी जागना होगा। यदि सीवरेज का पानी नर्मदा में मिलना बंद नहीं हुआ, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।” — उत्तमपाल सिंह पुरनी
प्रशासनिक लापरवाही पर उठाए सवाल
नगर परिषद कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन करोड़ों रुपये नर्मदा स्वच्छता के नाम पर खर्च कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि आस्था की नगरी में इस प्रकार की गंदगी का नर्मदा में मिलना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है।
ओंकारेश्वर में नर्मदा जल की शुद्धता का मुद्दा अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। इंदौर की घटना ने विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा दिया है, और ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ स्थल पर सीवरेज का मिलना सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।








