मुरैना (पहाड़गढ़)। शासन के नियम और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा फासला हो सकता है, इसका जीता-जागता उदाहरण पहाड़गढ़ विकासखंड के छात्रावासों में देखने को मिल रहा है। पहाड़गढ़ के सीनियर उत्कृष्ट बालक छात्रावास और शासकीय बालक आश्रम में रहने वाले छात्र हर रात ‘असुरक्षा’ के साये में गुजारने को मजबूर हैं। वजह यह है कि जिन अधीक्षकों के कंधों पर बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी है, वे सूरज ढलते ही मुख्यालय छोड़ अपने घरों को रवाना हो जाते हैं।
नियमों की धज्जियां: रात में केवल चौकीदार का सहारा
सरकारी नियमों के मुताबिक, छात्रावास अधीक्षकों को अनिवार्य रूप से मुख्यालय पर ही निवास करना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि रात के समय यदि किसी छात्र को अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्या या अन्य कोई परेशानी हो, तो अधीक्षक उसे तत्काल सहायता उपलब्ध करा सकें।
परंतु, पहाड़गढ़ के इन छात्रावासों में स्थिति बिल्कुल उलट है। यहाँ अधीक्षक बच्चों को राम भरोसे छोड़कर शाम होते ही अपने घरों (जैसे कैलारस आदि) के लिए निकल जाते हैं। रात के समय ये मासूम बच्चे केवल एक बूढ़े चौकीदार के भरोसे रहते हैं, जिसके पास किसी आपात स्थिति से निपटने का न तो प्रशिक्षण है और न ही अधिकार।

बीमारी की स्थिति में ‘सुबह’ का इंतजार
छात्रों ने दबी जुबान में बताया कि रात के समय छात्रावास में डर और असुरक्षा का माहौल रहता है। सबसे भयावह स्थिति तब होती है जब कोई बच्चा बीमार पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में पीड़ित छात्र के पास सुबह होने और अधीक्षक के वापस लौटने का इंतजार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता।
छात्रों की मुख्य चिंताएं
आपातकालीन सहायता का अभाव
रात में बीमार होने पर अस्पताल ले जाने वाला कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं होता।
सुरक्षा का डर
सुनसान इलाकों में स्थित छात्रावासों में अधीक्षकों की अनुपस्थिति बच्चों में मानसिक डर पैदा करती है।
अव्यवस्था
जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति में अनुशासन और खान-पान की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ता है।
अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही पर सवाल
पहाड़गढ़ के सीनियर उत्कृष्ट बालक छात्रावास और शासकीय बालक आश्रम के अधीक्षकों का मुख्यालय पर निवास न करना कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से यह खेल चल रहा है, लेकिन संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों ने अब तक इसकी सुध नहीं ली है।
क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? मुख्यालय पर निवास न करने वाले इन अधीक्षकों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है, जो वे शासन के आदेशों को ठेंगे पर रख रहे हैं?
प्रशासन को जागने की जरूरत
पहाड़गढ़ क्षेत्र के इन छात्रावासों में रहने वाले बच्चे अधिकतर गरीब और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आते हैं। उनकी सुरक्षा के साथ यह खिलवाड़ न केवल अमानवीय है, बल्कि सरकारी सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन भी है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे इन छात्रावासों का ‘औचक निरीक्षण’ (Surprise Inspection) करें और दोषी अधीक्षकों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।








