नगर के आधे से अधिक क्षेत्र को संस्कृति विभाग को सौंप देना भविष्य में विकास कार्यों के लिए बाधा बनेगा।
सिंहस्थ 2028 से पहले ओंकारेश्वर की राजस्व भूमि आवंटन पर बढ़ा विवाद
ओंकारेश्वर
तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में वर्ष 2019 से वर्तमान तक नगर परिषद की स्वीकृति एवं प्रस्ताव के बिना महत्वपूर्ण राजस्व भूमि को मध्य प्रदेश पर्यटन विकास एवं संस्कृति विभाग को आवंटित किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों ने इस निर्णय को प्रशासन की मनमानी बताते हुए विधायक, सांसद एवं मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
भौगोलिक स्थिति अलग, रोजगार के सीमित साधन
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि ओंकारेश्वर की भौगोलिक स्थिति अन्य शहरों एवं ज्योतिर्लिंगों से भिन्न है। यहां बड़े उद्योग-धंधे या रोजगार के साधन नहीं हैं। नगर की अधिकांश आबादी गरीब ब्राह्मण परिवारों, नाविकों, मजदूर वर्ग एवं छोटी दुकानों से अपनी जीविका चलाने वाले लोगों की है, जो पूजा-पाठ, नौका संचालन एवं छोटी दुकानों के माध्यम से जीवनयापन करते हैं।
सिंहस्थ 2028 के दौरान श्रद्धालुओं का आगमन मुख्यतः एक माह एवं विशेष शाही स्नान पर्वों तक सीमित रहेगा। ऐसे में स्थायी विस्थापन या भूमि हस्तांतरण से स्थानीय लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

जनप्रतिनिधियों के प्रमुख वक्तव्य
अंतर सिंह बारे (पूर्व अध्यक्ष,नगर परिषद ओंकारेश्वर)
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में संस्कृति विभाग को भूमि देने संबंधी सूचना प्राप्त हुई थी, परंतु परिषद की सहमति के बाद ही निर्णय लेने की बात कही गई थी। इसके बावजूद तत्कालीन कलेक्टर ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए नेचुरल गार्डन 2/3 एवं अन्य भूमि आवंटित कर दी। उन्होंने इसे परिषद की अनदेखी बताते हुए पूर्व में भी विरोध दर्ज कराया था और वर्तमान में भी इसका विरोध जारी रखने की बात कही।
प्रकाश परिहार ,(अध्यक्ष प्रतिनिधि एवं सांसद प्रतिनिधि, नगर परिषद,ओंकारेश्वर)
उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर जैसे छोटे नगर में भूमि सीमित है। बिना जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए निर्णय लेना उचित नहीं है। स्थानीय जनता में इस विषय को लेकर रोष है,

कालूराम केवट (पार्षद प्रतिनिधि)
उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से बसे स्थानीय परिवारों को विस्थापन की स्थिति में लाकर संस्कृति विभाग एवं धर्मशालाओं को भूमि देना अनुचित है।
उन्होंने वैकल्पिक प्रस्ताव रखते हुए कहा कि—
नेचुरल गार्डन, यात्रीका धर्मशाला के पास अतिरिक्त भूमि एवं वार्ड क्रमांक 3 की शौचालय के पीछे से लेकर हॉस्पिटल तिराहे तक भूमि को मिलाकर रोड डाइवर्ट कर पार्किंग बनाई जा सकती है।
जेपी चौक से नगर घाट होते हुए नए बस स्टैंड तक प्रस्तावित मार्ग का चौड़ीकरण किया जाए।
पुराने नगर परिषद व्यू पॉइंट से घाटों तक सीधा नवीन घाट विकसित किया जा सकता है।

सुनील बटवाल (स्थानीय निवासी)
उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर तीन पहाड़ियों— ब्रह्मपुरी, विष्णुपुरी एवं शिवपुरी— से मिलकर बना है, जहां भूमि की भारी कमी है।
उन्होंने सुझाव दिया कि—
विस्थापन की स्थिति में आने वाले स्थानीय परिवारों को उपलब्ध भूमि पर बसाया जाए।
ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में नए पुल निर्माण के साथ ही वेटिंग हॉल बनाया जाए।
नागर घाट से ओंकार मठ तक पुल निर्माण के साथ ही क्षेत्र में वेटिंग हॉल विकसित किया जा सकता हैं।
बाहेती धर्मशाला की रिक्त भूमि लगभग दस हजार वर्गफीट तथा जूना महल क्षेत्र में भी वेटिंग हॉल का निर्माण संभव है।

पंडित नवल किशोर शर्मा (पूर्व उपाध्यक्ष, नगर परिषद)
उन्होंने नेचुरल गार्डन, एनवीडीए गेस्ट हाउस एवं अन्य भूमियों के आवंटन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर में भूमि की पहले ही कमी है। इन भूमियों का उपयोग नगर विकास, पार्किंग एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार हेतु किया जा सकता है। आधे से अधिक नगर क्षेत्र को संस्कृति विभाग को सौंप देना भविष्य में विकास कार्यों के लिए बाधा बनेगा।
घाट विस्तार एवं पार्किंग व्यवस्था की मांग
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि हरिद्वार की तर्ज पर घाटों का विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन, नर्मदा स्नान एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके, विशेषकर भीषण गर्मी के दौरान।
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए पार्किंग, वेटिंग हॉल, मार्ग चौड़ीकरण एवं घाट विस्तार जैसे स्थायी एवं कम तोड़फोड़ वाले विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री एवं केंद्र सरकार को ज्ञापन की तैयारी
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस विषय पर शीघ्र पुनर्विचार नहीं किया गया तो प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों एवं प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर ओंकारेश्वर की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएगा।
तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच भूमि आवंटन को लेकर यह विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक रूप लेता नजर आ रहा है।









