मुरैना। केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (pm awas yojana) मुरैना जिले की पोरसा तहसील में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्राम खुर्द के आक्रोशित ग्रामीणों ने सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और योजना की सूची में भारी धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पात्र बेघर, अपात्रों के ‘महल’: ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि ग्राम खुर्द में अनुसूचित जाति (SC) और निर्धन वर्ग के 40 से अधिक ऐसे परिवार हैं, जिनके पास रहने को पक्की छत नहीं है। ये परिवार आज भी जर्जर और कच्चे झोपड़ों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इन्हें ‘अपात्र’ कर दिया गया है।
अनियमितताओं के मुख्य बिंदु
रसूखदारों को लाभ
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन लोगों के पास पहले से ही आलीशान पक्के मकान हैं या 20 से 25 बीघा जमीन है, उन्हें मिलीभगत कर आवास स्वीकृत कर दिए गए।
सूची से छेड़छाड़
आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों ने सांठगांठ कर वास्तविक गरीबों के नाम सूची से हटा दिए और अपने चहेतों के नाम जोड़ दिए।
जांच की मांग
ग्रामीणों ने गांव के लिए जारी 275 आवासों की पूरी सूची की निष्पक्ष और नए सिरे से जांच करने की मांग उठाई है।
“दोषी अधिकारियों पर हो FIR”— ग्रामीणों की मांग
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यह केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित भ्रष्टाचार है। उन्होंने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से पात्र हितग्राहियों का सर्वे कर उन्हें योजना से जोड़ा जाए।
भ्रष्टाचार में लिप्त सचिव और दोषी अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। वहीं अपात्र लोगों को जारी की गई राशि की वसूली हो।








