Sakat Chauth 2026 : आज 6 जनवरी 2026, मंगलवार को पूरे देश में सकट चौथ का पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। माघ मास की इस चतुर्थी को ‘तिलकुटा चौथ’ और ‘संकष्टी चतुर्थी’ भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर अपनी तीव्र बुद्धि और भक्ति का परिचय दिया था।
आज का दिन उन माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मंगलवार का दिन होने के कारण इस बार की चतुर्थी का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इसे हनुमान जी की कृपा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
सकट चौथ 2026: तिथि और समय, पूजा के शुभ मुहूर्त
- चतुर्थी तिथि : 6 जनवरी 2026, सुबह 08:01 बजे से शुरू 7 जनवरी 2026, सुबह 06:52 बजे तक रहेगी।
- अमृत काल (सर्वोत्तम): सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से 12:48 बजे तक
- लाभ – उन्नति मुहूर्त: सुबह 11:09 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
- प्रदोश काल (शाम की पूजा): शाम 04:39 बजे से 06:39 बजे तक (यह समय गणेश पूजन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है)।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक (इस योग में किए गए कार्य सफल होते हैं)।
- भद्रा काल: आज सुबह 07:15 बजे से 08:03 बजे तक भद्रा रही, जो चतुर्थी तिथि शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गई।
- राहुकाल: दोपहर 03:03 बजे से शाम 04:21 बजे तक रहेगा। इस दौरान नई पूजा शुरू करने से बचना चाहिए।
सकट चौथ पूजन विधि: कैसे करें भगवान गणेश को प्रसन्न?
शास्त्रों के अनुसार, सकट चौथ की पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यदि आप घर पर पूजन कर रहे हैं, तो इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
चौकी की स्थापना
एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। उनके साथ रिद्धि-सिद्धि की भी पूजा करें।
कलश स्थापना
गणेश जी के समीप एक जल से भरा कलश रखें जिस पर रोली से अक्षत और कलावा बांधा गया हो।
विशेष भोग (तिलकुटा)
आज के दिन तिल और गुड़ को कूटकर बनाया गया ‘तिलकुटा’ सबसे महत्वपूर्ण प्रसाद होता है। इसके अलावा बप्पा को 21 दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
कथा श्रवण
सकट चौथ की पौराणिक कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। माना जाता है कि बिना कथा के व्रत अधूरा रहता है।
चंद्र दर्शन
रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
श्री गणेश जी की कथा
प्राचीन समय में एक नगर में एक अत्यंत निर्धन और दृष्टिहीन बुढ़िया रहती थी। वह भगवान गणेश की अनन्य भक्त थी और प्रतिदिन उनकी आराधना करती थी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन स्वयं विघ्नहर्ता गणेश प्रकट हुए और बोले— “माई, मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ, जो चाहे मांग ले।”
बुढ़िया संकोच में पड़ गई और बोली— “प्रभु, मुझे तो मांगना भी नहीं आता, मैं क्या मांगू?” तब गणेश जी ने कहा— “अपने पुत्र और बहू से सलाह लेकर मांग ले।”
पुत्र और बहू की अलग-अलग राय
जब बुढ़िया ने अपने पुत्र से पूछा, तो उसने कहा— “माँ, धन मांग ले जिससे हमारी गरीबी दूर हो जाए।” वहीं बहू ने कहा— “माँ, अपने लिए पोता मांग ले ताकि वंश आगे बढ़े।” बुढ़िया असमंजस में थी। उसने सोचा कि पुत्र धन मांग रहा है और बहू पोता, लेकिन मुझे तो अपनी आंखें चाहिए ताकि मैं भगवान के दर्शन कर सकूँ। अगले दिन जब गणेश जी आए, तो बुढ़िया ने अपनी चतुराई और श्रद्धा का परिचय देते हुए कहा:
“प्रभु! यदि आप प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया (धन) दें, निरोगी काया (आंखें) दें, अमर सुहाग दें, पोता दें और अंत में मोक्ष प्रदान करें।”
भगवान गणेश उसकी चतुरता और सरलता पर मुस्कुराए और बोले— “माई, तूने तो मुझे ठग लिया, पर जो तूने मांगा है, वह सब तुझे मिलेगा।” ऐसा कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गए और बुढ़िया को सब कुछ प्राप्त हो गया।
चंद्रोदय का सटीक समय (6 जनवरी 2026)
सकट चौथ के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, भारत के विभिन्न शहरों में आज चंद्रोदय का संभावित समय इस प्रकार रहेगा।
शहर चंद्रोदय का संभावित समय (रात)
दिल्ली 08:45 PM
मुंबई 09:12 PM
जयपुर 08:52 PM
लखनऊ 08:33 PM
पटना 08:18 PM
इंदौर 08:58 PM
कोलकाता 08:05 PM
नोट: भौगोलिक स्थिति के आधार पर चंद्रोदय के समय में 5 से 10 मिनट का अंतर हो सकता है। बादलों की स्थिति के कारण यदि चंद्रमा दिखाई न दे, तो ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुभ समय पर अर्घ्य दिया जा सकता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र और महत्व
शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा को जल देते समय तांबे के लोटे में थोड़ा दूध, अक्षत (चावल) और सफेद फूल डालना चाहिए। अर्घ्य देते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है
“गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥”
ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से कुंडली में ‘चंद्र दोष’ दूर होता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। संतान पक्ष की ओर से आने वाली बाधाएं भी बप्पा की कृपा से समाप्त हो जाती हैं।
सकट चौथ का व्रत श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। जो लोग स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत नहीं रख सकते, वे फलाहार कर सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन किसी का अपमान न करें और क्रोध से बचें।
डिस्क्लेमर : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। व्यक्तिगत पूजा अनुष्ठान के लिए आप अपने स्थानीय पंडित या पुरोहित से भी परामर्श कर सकते हैं। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए khabarmandi.in उत्तरदायी नहीं है।








