नई दिल्ली/अध्यात्म डेस्क। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘षटतिला एकादशी’ के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि यह दिन आत्म-शुद्धि, संयम और दान की परंपरा को समर्पित है। वर्ष 2026 में षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व भी मनाया जाता है। यह व्रत जातक के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है।
षटतिला एकादशी का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, ‘षटतिला’ शब्द का अर्थ है—छह प्रकार से तिल का उपयोग। माघ मास की कड़कड़ाती ठंड में तिल का प्रयोग न केवल धार्मिक रूप से शुभ माना गया है, बल्कि आयुर्वेद के अनुसार भी यह शरीर को ऊर्जा और आरोग्य प्रदान करने वाला होता है।
धार्मिक दृष्टिकोण से यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखने और सात्विक जीवन जीने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक विचारों का संचार होता है। यह एकादशी हमें सिखाती है कि भोजन और इंद्रियों पर संयम रखकर किस प्रकार आध्यात्मिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
षटतिला एकादशी व्रत की सरल पूजा विधि
षटतिला एकादशी पर पूजा की प्रक्रिया अत्यंत सरल और भावपूर्ण है। इसे आप निम्न चरणों में संपन्न कर सकते हैं:
- सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो जल में थोड़े तिल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है।
- स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- भगवान को धूप, दीप, नैवेद्य और विशेष रूप से तिल से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं।
- इस दिन छह तरीकों से तिल का उपयोग करने का विधान है— स्नान, उबटन, तर्पण, दान, भोजन (फलाहार में) और हवन।
- रात्रि के समय संभव हो तो सत्संग या भजन-कीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक चिंतन करें।
षटतिला एकादशी: क्या करें और क्या न करें (नियम और मान्यताएँ)
एकादशी व्रत का उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि मन को विकारों से मुक्त रखना है। शास्त्रों में इस दिन के लिए कुछ विशेष सुझाव दिए गए हैं:
क्या करें?
- इस दिन तिल और गरम कपड़ों का दान करना सामाजिक उत्तरदायित्व और परोपकार की दृष्टि से उत्तम है।
- इस पूरे दिन शांत रहें और वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी के प्रति द्वेष भावना न लाएं।
- यदि पूर्ण उपवास संभव न हो, तो केवल फलाहार ग्रहण करें।
क्या न करें?
- इस दिन प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा और नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए।
- हिंदू परंपरा में एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है, इसके पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों कारण बताए गए हैं।
- घर में शांति का वातावरण बनाए रखें और वाद-विवाद से दूर रहें।








