खंडवा। शहर के रामनगर क्षेत्र में शिव शक्ति महिला मंडल द्वारा आयोजित सात दिवसीय शिवमहापुराण कथा में भक्ति और उपदेशों की अविरल धारा बह रही है। कथा के विशेष प्रसंग में व्यासपीठ से बनवारी भाई उपमन्यु जी ने शिव-पार्वती विवाह के माध्यम से आधुनिक समाज को परिवार और मर्यादाओं का पाठ पढ़ाया।
शिव-पार्वती विवाह: विश्वास और सम्मान का आदर्श
कथावाचक ने शिव-पार्वती के अलौकिक विवाह का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव ‘त्याग’ और माता पार्वती ‘समर्पण’ की प्रतिमूर्ति हैं।
दांपत्य सूत्र
उन्होंने कहा कि आज के दौर में टूटते परिवारों को बचाने के लिए आपसी विश्वास और सम्मान अनिवार्य है। भौतिक सुखों की अंधी दौड़ में व्यक्ति अपने संस्कारों को पीछे छोड़ रहा है, जो पतन का कारण है।
संगति का असर
व्यासपीठ से संदेश दिया गया कि यदि कोई रिश्ता या संगति आपके जीवन को गलत दिशा में ले जा रही हो, तो समय रहते उससे दूरी बना लेना ही समझदारी है।
संस्कार और बेटियां: पिता-पुत्री के अटूट स्नेह पर जोर
उपमन्यु जी ने वर्तमान परिदृश्य में बेटियों की भूमिका और उनके प्रति समाज की जिम्मेदारी पर विशेष व्याख्यान दिया।
मर्यादा का पालन
उन्होंने कहा कि पिता और पुत्री का रिश्ता स्नेह की पराकाष्ठा है। बेटियों को चाहिए कि वे आधुनिकता की चकाचौंध में अपने माता-पिता के भरोसे और परिवार की मर्यादाओं को कभी आंच न आने दें।
संस्कार ही असली धन
प्रवचन में जोर दिया गया कि धन कमाना बुरा नहीं है, लेकिन संस्कारों की बलि देकर कमाया गया धन कभी सुख नहीं देता।
भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ रामनगर
कथा के दौरान जब शिव विवाह का प्रसंग आया, तो श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। संगीतमय भजनों के साथ आरती की गई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण हुआ। शिव शक्ति महिला मंडल के इस आयोजन में बड़ी संख्या में माताएं-बहनें और क्षेत्रवासी शामिल हो रहे हैं।
जीवन की ‘सही दिशा’ का बोध
कथा का सार यही रहा कि मनुष्य को सफल होने के साथ-साथ एक ‘संस्कारी मनुष्य’ बनना अधिक आवश्यक है। सही दिशा और विवेकपूर्ण निर्णय ही व्यक्ति को संकटों से बचा सकते हैं।








