सिंगरौली। कभी-कभी एक छोटा सा वीडियो किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है। ग्राम मुड़वनिया की 8 वर्षीय मासूम दिल कुमारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जन्म से पैरों से लाचार दिल कुमारी, जो कभी लकड़ी के सहारे चलने को मजबूर थी, अब रेडक्रॉस की मदद से मिली नई व्हीलचेयर पर सवार होकर अपने सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाएगी।
सोशल मीडिया बना वरदान: लकड़ी लेकर चलने का वीडियो हुआ था वायरल
हाल ही में दिल कुमारी का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह लकड़ी का सहारा लेकर चलने की कोशिश कर रही थी। इस वीडियो ने लोगों का दिल झकझोर दिया। युवक कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष सूर्या द्विवेदी ने इस वीडियो के जरिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया और बच्ची के लिए तत्काल मदद की मांग उठाई।
विशेषज्ञों की राय: ‘दिल कुमारी’ फिर से चल सकेगी
जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के पी एंड ओ (प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक) विभाग ने बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों ने एक बड़ी उम्मीद जगाते हुए बताया कि यह सीटीईवी (CTEV) का मामला है। विशेषज्ञों के अनुसार, उचित सर्जिकल उपचार (सर्जरी) के बाद इस बात की पूरी संभावना है कि दिल कुमारी भविष्य में बिना किसी सहारे के अपने पैरों पर चल सकेगी।
रेडक्रॉस और प्रशासन ने बढ़ाया मदद का हाथ
जिला कलेक्टर एवं रेडक्रॉस सह-अध्यक्ष गौरव बैनल, चेयरमैन एस.डी. सिंह और सचिव डॉ. ओ.पी. राय के मार्गदर्शन में त्वरित कार्रवाई की गई। दिल कुमारी को न केवल अत्याधुनिक व्हीलचेयर दी गई, बल्कि उसे सर्दियों के लिए गर्म कपड़े, स्कूल बैग और पानी की बोतल भी भेंट की गई। जैसे ही बच्ची को व्हीलचेयर मिली, उसके चेहरे की मुस्कान ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। उसने तुरंत खुद व्हीलचेयर चलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।
राजनीतिक और प्रशासनिक तालमेल
इस मानवीय कार्य के दौरान सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक अरविंद डामोर और समग्र विस्तार अधिकारी दीपक सोनी भी मौजूद रहे। जहाँ एक ओर सूर्या द्विवेदी ने इसे पूर्व की लापरवाही बताते हुए प्रशासन को घेरा था, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने तत्परता दिखाकर यह सिद्ध किया कि संवेदनशील मदद से किसी का भी जीवन संवारा जा सकता है।
“सही सहयोग और समय पर मिली मदद दिव्यांगता को आत्मनिर्भरता में बदल सकती है। सिंगरौली रेडक्रॉस की यह पहल समाज के लिए एक मिसाल है।”
दिल कुमारी की यह कहानी बताती है कि जब मीडिया, जागरूक नागरिक और प्रशासन एक साथ मिलते हैं, तो बदलाव निश्चित है। व्हीलचेयर मिलना तो सिर्फ शुरुआत है; अब प्रशासन की अगली प्राथमिकता उसकी सर्जरी कराना है ताकि वह वाकई अपने पैरों पर खड़ी हो सके।








