सिंगरौली। जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए रीवा लोकायुक्त की टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। चुरकी हल्का के पटवारी अमरीश सिंह वैश्य को शनिवार को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। पटवारी ने यह राशि जमीन के सीमांकन और बंटवारे के एवज में मांगी थी।
शिकायत से जाल बिछाने तक का सफर
मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता महेंद्र प्रसाद ने लोकायुक्त कार्यालय, रीवा में पटवारी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई।
महेंद्र प्रसाद ने बताया कि उनकी जमीन के सीमांकन और बंटवारे के सरकारी काम के लिए पटवारी अमरीश सिंह वैश्य ₹30,000 की अवैध मांग कर रहा था। शिकायत का सत्यापन होने के बाद, लोकायुक्त निरीक्षक संदीप भदौरिया के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम ने एक ‘ट्रैप’ तैयार किया।
मोरवा मेन रोड पर रंगे हाथ पकड़ाया पटवारी
योजना के मुताबिक, जैसे ही शिकायतकर्ता ने मोरवा थाना क्षेत्र के मेन रोड इलाके में पटवारी को रिश्वत की पहली किश्त के रूप में ₹10,000 थमाए, वैसे ही आसपास छिपी लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया। पटवारी के हाथ रसायनों (फेनोल्फ्थेलिन) से धुलवाए गए, जिससे उसके रिश्वत लेने की पुष्टि वैज्ञानिक रूप से भी हो गई। लोकायुक्त टीम ने आरोपी के पास से रिश्वत के पैसे मौके पर ही बरामद कर लिए।

प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय और राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता लाने और घूसखोरी पर लगाम लगाने की दिशा में एक कड़ा प्रशासनिक संदेश माना जा रहा है।
आम जनता में खुशी
स्थानीय नागरिकों ने लोकायुक्त की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि सीमांकन और बंटवारे जैसे कामों के लिए अक्सर किसानों और आम जनता को पटवारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं और उन्हें आर्थिक शोषण का शिकार होना पड़ता है।








