रिटायरमेंट से पहले ट्रांसफर खेल, बाद में जांच कार्रवाई
अंधेर खेल: रिटायरमेंट से पहले ‘ट्रांसफर एक्सप्रेस’, बाद में जांच एक्सप्रेस
जनजातीय कार्य विभाग में अवैध स्थानांतरण-नियुक्तियां निरस्त, छात्रावास अधीक्षक निलंबित
खंडवा/खबर मंडी विशेष
जनजातीय कार्य विभाग में बीते दिनों जो “तेजी” दिखाई गई, वह अब प्रशासनिक ब्रेक लगने के बाद सवालों के घेरे में है। रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़े एक अधिकारी द्वारा कथित रूप से किए गए स्थानांतरण और नियुक्तियों के इस “स्पेशल ड्राइव” को कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने पूरी तरह निरस्त कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय दल गठित कर 5 दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
जांच दल में अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा, जिला कोषालय अधिकारी श्री आर.एस. गवली और डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी सहायक आयुक्त श्री बजरंग बहादुर सिंह को शामिल किया गया है। वहीं इस मामले में छात्रावास अधीक्षक श्री हेमंत सिन्हा को निलंबित कर दिया गया है।
विदाई पार्टी से ‘विवाद पार्टी’ तक का सफर
बताया जा रहा है कि जिस समय यह पूरा “ट्रांसफर खेल” अपने चरम पर था, उसी दौरान विभागीय अधिकारी की विदाई को लेकर भव्य समारोह भी आयोजित किया गया। समारोह में बड़े-बड़े चेहरे शामिल हुए, माहौल में खुशियों की मिठास थी और उपलब्धियों के किस्से गूंज रहे थे।
लेकिन जैसे ही “अंदर की बात” बाहर आई, वही खुशी कुछ ही समय में गम में बदल गई। चर्चा है कि स्थानांतरण और नियुक्तियों में कथित लेन-देन की बातें आपस में ही लीक हो गईं। बस फिर क्या था—जिस खेल को पर्दे के पीछे खेला जा रहा था, वह मंच पर आ गया।
प्रभारी मंत्री के दौरे में खुला मामला
शनिवार को प्रभारी मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के खंडवा दौरे के दौरान जब इस गड़बड़ी की सूचना सामने आई, तो प्रशासन ने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए सभी आदेशों को निरस्त कर दिया। कलेक्टर श्री गुप्ता ने बिना देर किए जांच के आदेश जारी कर दिए।

‘रिटायरमेंट बोनस’ या ‘प्रशासनिक प्रयोग’?
यह है कि जिस समय अधिकारी अपने सेवा काल के अंतिम दिनों में थे, उसी समय इतनी बड़ी संख्या में स्थानांतरण और नियुक्तियां जारी कर दी गईं—मानो यह कोई “रिटायरमेंट बोनस योजना” हो।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सब महज संयोग था, या फिर एक सुनियोजित “ट्रांसफर उद्योग”?
खेल पड़ा उल्टा
जो योजना शायद चुपचाप पूरी हो जाने की उम्मीद थी, वही अब जांच के दायरे में है। आदेश निरस्त हो चुके हैं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चर्चा में ‘ऊपर’ तक कनेक्शन
अब इस पूरे घटनाक्रम में एक और पहलू चर्चा में है। कहा जा रहा है कि मंत्री के विभाग से जुड़े होने और एक करीबी माने जाने वाले रिटायर्ड अधिकारी द्वारा रिटायरमेंट से ठीक पहले किए गए फैसलों पर अचानक ब्रेक लगना और उन्हें निरस्त किया जाना, प्रशासनिक गलियारों में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
यह घटनाक्रम अब सिर्फ विभागीय अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि “कनेक्शन बनाम एक्शन” की बहस को भी जन्म दे रहा है।








