मध्यप्रदेश एसटीएफ (Special Task Force) ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित अनूपपुर जिले के घने जंगलों में की गई इस कार्रवाई में 599 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा जब्त किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत करीब 1.80 करोड़ रुपये आंकी गई है। तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 30 लाख की कीमत वाले ट्रक को भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है।
फिल्म स्टाइल में बनाया था ‘गुप्त कम्पार्टमेंट’
तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए शातिराना तरीका अपनाया था। एसटीएफ ने जब ट्रक की बारीकी से तलाशी ली, तो उसमें लोहे की चादर से बना एक विशेष गुप्त कम्पार्टमेंट (Secret Compartment) मिला। इसी केबिन में गांजे के पैकेट छिपाकर रखे गए थे। अगर मुखबिर की पुख्ता सूचना न होती, तो सामान्य तलाशी में इस खेप को पकड़ पाना नामुमकिन था।
ओडिशा से मध्यप्रदेश तक फैला तस्करी का जाल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नशे की यह बड़ी खेप ओडिशा से लाई जा रही थी और इसे मध्यप्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई किया जाना था। इस खेप की कीमत करीब ₹2.10 करोड़ (गांजा + ट्रक) बताई जा रही है पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को दबोचा है, जो ट्रक में सवार थे। गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस की पूछताछ जारी है, जिससे प्रदेश में फैले नशा माफिया के बड़े नामों का खुलासा होने की उम्मीद है।
नशा मुक्त समाज के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’
मध्यप्रदेश पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध मादक पदार्थों के व्यापार के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति जारी रहेगी। अनूपपुर का घना वन क्षेत्र अक्सर अंतर्राज्यीय तस्करी के लिए इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन एसटीएफ की इस चौकसी ने तस्करों की कमर तोड़ दी है।
पुलिस ने शुरु की ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश
एसटीएफ की यह सफलता न केवल नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने वाली है, बल्कि उन सिंडिकेट्स के लिए भी चेतावनी है जो ओडिशा और आंध्र प्रदेश के रास्तों से मध्यप्रदेश में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। अब पुलिस की नजर इस काले कारोबार के ‘मास्टरमाइंड’ पर है।








