नई दिल्ली। अमेरिका से ट्रेड और टैरिफ के बढ़ते तनाव के बीच भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को नई दिल्ली में आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभाल लिया। गोर की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच टैरिफ (Tariff) और प्रतिबंधों को लेकर कूटनीतिक रस्साकशी जारी है। कार्यभार संभालने के बाद गोर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के लिए भारत से महत्वपूर्ण कोई दूसरा साझेदार नहीं है। उन्होंने ट्रेड डील को लेकर कहा कि मंगलवार को दोनों देशों के अधिकारियों के बीच फोन पर चर्चा होने वाली है।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प की ‘सच्ची दोस्ती’ का हवाला
कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में राजदूत गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह इस देश के लिए मन में गहरा सम्मान लेकर आए हैं।
“अमेरिका के राजदूत के तौर पर यहां मौजूद होना बेहद गर्व की बात है। मेरा मिशन क्लियर है। मुझे इन दो महान देशों—दुनिया की सबसे पुरानी डेमोक्रेसी (अमेरिका) और दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी (भारत)—के बीच की भागीदारी को नेक्स्ट लेवल पर ले जानी है।”
गोर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच सच्ची दोस्ती है जो कठिन समय में भी संवाद के रास्ते खुले रखती है।”
ट्रेड तनाव का बढ़ता दायरा: 50% से 500% तक टैरिफ की तलवार
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मतभेद प्रमुख चुनौती बने हुए हैं। फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इंडियन प्रोडक्ट्स पर 50% टैरिफ लगाया हुआ है, जिससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ा है।
हालांकि, सबसे बड़ी चिंता इसी महीने ट्रम्प द्वारा कथित तौर पर सैंक्शनिंग रशिया एक्ट बिल को मंजूरी देने की खबर है। यदि यह बिल लागू होता है, तो भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैरिफ की दर 500% तक बढ़ सकती है। यह संभावित वृद्धि न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन के लिए भी एक गंभीर झटका साबित हो सकती है।
वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक विश्लेषण
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि सर्जियो गोर की नियुक्ति एक ‘डैमेज कंट्रोल’ और ‘ग्रोथ’ दोनों रणनीतियों का हिस्सा है। एक तरफ जहां अमेरिका अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कड़े व्यापारिक कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए उसे भारत जैसे मजबूत सहयोगी की दरकार है।
सर्जियो गोर का भारत आना यह संकेत देता है कि अमेरिका कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को टूटने नहीं देना चाहता। हालांकि, आने वाले महीनों में होने वाली द्विपक्षीय वार्ताएं यह तय करेंगी कि ‘सच्ची दोस्ती’ का दावा व्यापारिक युद्ध (Trade War) की कड़वाहट को कम करने में कितना कारगर साबित होता है।








