कुशीनगर एक्सप्रेस में “रेल नीर” की जगह अन्य पानी की बिक्री, यात्रियों से अधिक वसूली के आरोप
अंधेर मची है, लूट सके तो लूट—
जो जागा वही बचा, वरना सफर में भी जेब कटती छूट।
खबर मंडी
खंडवा/बुरहानपुर।
भारतीय रेल में यात्रियों को स्वच्छ पेयजल निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने के लिए IRCTC द्वारा “रेल नीर” की व्यवस्था लागू है, लेकिन कुशीनगर एक्सप्रेस और संबंधित स्टेशनों पर इस व्यवस्था की गंभीर अनदेखी सामने आई है। आरोप है कि ट्रेन के अंदर ही नहीं, बल्कि स्टेशन परिसरों में भी “रेल नीर” के स्थान पर अन्य ब्रांड का पानी बोतलों में भरकर अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।
मामले को लेकर एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित रूप से यह दिखाया जा रहा है कि किस तरह अधिकृत वेंडर और अवैध वेंडर की मिलीभगत से “रेल नीर” की जगह अन्य पानी को बोतलों में भरकर यात्रियों को बेचा जा रहा है। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि यह केवल एक-दो मामलों तक सीमित न होकर संगठित स्तर पर चल रही अनियमितता हो सकती है।

यात्रियों का कहना है कि जब वे “रेल नीर” की मांग करते हैं, तो उन्हें या तो उपलब्ध न होने की बात कह दी जाती है या फिर दूसरे ब्रांड का पानी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। कई यात्रियों ने अधिक कीमत वसूले जाने की भी शिकायत की है। इससे यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और पानी की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रेलवे के नियम स्पष्ट हैं कि ट्रेनों और स्टेशनों पर केवल अधिकृत ब्रांड “रेल नीर” ही निर्धारित मूल्य पर बेचा जाना चाहिए। इसके बावजूद यदि अन्य पानी को भरकर बेचा जा रहा है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों के स्वास्थ्य और अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
इस पूरे मामले में जब डीआरएम से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि वे भुसावल पहुंचने के बाद इस मामले को देखेंगे और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेंगे। डीआरएम के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मामले में कितनी गंभीरता से जांच होती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
यात्रियों और स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अधिकृत एवं अवैध वेंडरों की भूमिका की जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ट्रेनों और स्टेशनों पर “रेल नीर” की उपलब्धता और निर्धारित दर का सख्ती से पालन हो, ताकि यात्रियों को इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े।








