आदिम जाति कल्याण विभाग में फर्जी अंकसूची से 10 साल नौकरी का खेल खंडवा कोर्ट सख्त: हॉस्टल अधीक्षक को 3 साल की सजा, सास भी दोषी करार
फर्जी मार्कशीट से नौकरी का खेल उजागर
खंडवा कोर्ट का सख्त फैसला: हॉस्टल अधीक्षक को 3 साल की सजा, सास भी दोषी करार
खंडवा/खबर मंडी विशेष
( सुशील विधाणी)
खंडवा जिले में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का बड़ा मामला न्यायालय में साबित हो गया। लगभग पांच वर्षों तक चली सुनवाई के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी हॉस्टल अधीक्षक मोहन सिंह काजले को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 27 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं सहआरोपी उसकी सास भगवती बाई को भी दोषी मानते हुए 6 माह की जेल और 2 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया गया।
मामले की जानकारी के अनुसार, मोहन सिंह काजले ने स्नातक की फर्जी अंकसूची तैयार कराकर शासकीय सेवा में प्रवेश लिया था। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर वह करीब 10 वर्षों तक खरगोन जिले में विभिन्न पदों पर कार्य करता रहा। बाद में उसकी पदस्थापना खालवा क्षेत्र में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत हॉस्टल अधीक्षक के रूप में की गई।
शिकायत के बाद खुला फर्जीवाड़ा
छैगांव माखन में पदस्थापना के दौरान आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बाद विभागीय जांच कराई गई, जिसमें यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
खंडवा सिटी कोतवाली पुलिस ने दिसंबर 2020 में आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 772/2020 दर्ज किया था। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 201 (सबूत मिटाना) और 120-बी (षड्यंत्र) के तहत मामला कायम किया गया। पुलिस ने जांच पूर्ण कर 24 फरवरी 2021 को न्यायालय में चालान पेश किया।
पांच साल बाद आया फैसला

वर्ष 2021 से न्यायालय में विचाराधीन इस मामले में 25 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया गया। न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया और सख्त सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक अश्विनी भाटे ने प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप यह निर्णय आया।
कैमरा देखते ही मुंह छुपाकर भागा आरोपी
फैसला सुनाए जाने के बाद जब मीडिया कर्मियों ने आरोपी को कैमरे में कैद करने का प्रयास किया, तो वह मुंह पर कपड़ा रखकर न्यायालय परिसर में ही भागने लगा। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
प्रशासन के लिए बड़ा संदेश
यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लंबे समय तक सेवा में रहने के बावजूद आरोपी कानून के शिकंजे से बच नहीं सका, जो यह दर्शाता है कि जांच और न्याय प्रक्रिया भले समय ले, लेकिन दोषियों तक पहुंचती जरूर है।








