“खंडवा में कड़क एंट्री: नजरों से स्कैन, फैसलों में एक्शन—एसपी आगम जैन से बदलेगा कानून व्यवस्था का चेहरा”
“ना रुतबे से, ना शोर से पहचान होगी,
अब खंडवा में काम से ही हर इंसान की पहचान होगी।”

खंडवा खबर मंडी विशेष
(सुशील विधाणी )
खंडवा में नए पुलिस अधीक्षक के आगमन की खबर चिंगारी की तरह पूरे शहर में फैल चुकी है। 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी अगम जैन के पदभार संभालने से पहले ही माहौल बदलता नजर आ रहा है। बधाइयों का दौर शुरू है—गुलदस्ते, मुलाकातें, सिफारिशों की फाइलें और अपने-अपने मुद्दों की सूची लेकर पहुंचने वालों की हलचल तेज हो गई है।
शहर के कुछ तथाकथित नेता और छोटे-बड़े व्यापारी भी सक्रिय हो चुके हैं, जो अपने प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए एसपी कार्यालय के बाहर मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में हैं। शुरुआती दिनों में यह “औपचारिक भीड़” बनी रहना तय माना जा रहा है। वहीं विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, समाजसेवी और संगठन भी अपने आमंत्रण और अपेक्षाओं के साथ सामने आने वाले हैं। खंडवा की सांस्कृतिक पहचान—जिसमें महान गायक Kishore Kumar से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं—को लेकर भी कई लोग अपनी बात रखने की तैयारी में हैं।
हालांकि, इस बार तस्वीर अलग रहने की उम्मीद है। अगम जैन की पहचान ऐसे अधिकारी की है जो व्यक्ति को उसके व्यवहार और तथ्यों से परखते हैं—न कि बाहरी दिखावे से। उनकी नजरें ही बहुत कुछ “स्कैन” कर लेती हैं। वे शांत होकर सबकी बात सुनते हैं, लेकिन निर्णय वही लेते हैं जो कानून और शहरहित में उचित हो।

इसी के साथ खंडवा के लिए एक और सकारात्मक पहलू सामने आता है— प्रशासनिक “केमिस्ट्री”। जिले में कार्यरत आईएएस अधिकारी Rishav Gupta और आईपीएस अगम जैन के कार्य करने का तरीका और स्वभाव कई मायनों में समान बताया जा रहा है। दोनों ही अधिकारी सुनने में धैर्यवान, निर्णय में दृढ़ और कार्य में परिणामोन्मुख हैं।
बीते अनुभवों में यह भी सामने आया है कि कई योजनाएं सहायक तंत्र की ढिलाई के कारण अधूरी रह जाती हैं। लेकिन जल गंगा संवर्धन जैसी परियोजना में खुद नेतृत्व करते हुए जमीनी स्तर पर उतरकर कार्य को अंतिम चरण तक पहुंचाने का उदाहरण यह दर्शाता है कि यहां केवल योजनाएं नहीं, बल्कि परिणाम प्राथमिकता हैं।
खंडवा शहर के लिए यह किसी सौभाग्य से कम नहीं कि आईएएस और आईपीएस—दोनों स्तर पर समान सोच और तालमेल वाले अधिकारी एक साथ मिले हैं। ऐसे में “डबल इंजन” की तरह प्रशासन और पुलिस की संयुक्त गति से शहर में विकास और कानून व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह नेतृत्व शुरुआती औपचारिकताओं और भीड़भाड़ से आगे बढ़कर कितनी तेजी से जमीनी बदलाव लाता है। “सपोर्टिंग हीरो” की भीड़ भले ही कुछ समय तक सक्रिय रहे, लेकिन असली पहचान उसी की होगी जो परिणाम देगा।
खंडवा एक नए दौर की दहलीज पर है—जहां दिखावे से ज्यादा काम, और पहचान से ज्यादा परिणाम की अहमियत होगी। यह कार्यकाल न केवल प्रशासनिक कसावट, बल्कि जनविश्वास की नई मिसाल भी बन सकता है।








