रतलाम। चिकलाना गांव में जिस एमडी (MD) ड्रग्स फैक्ट्री पर पुलिस ने दो दिन पहले फिल्मी अंदाज में छापा मारा था, उसकी परतों के नीचे एक और खौफनाक सच छिपा निकला। मुख्य आरोपी दिलावर पठान ने न केवल गांव को नशे की आग में झोंका, बल्कि सूतखोरी और दहशत के दम पर सैकड़ों ग्रामीणों की जमीनें भी छीन लीं। अब पुलिस ने इस दहशतगर्दी को खत्म करने के लिए ‘विलेज कैंप’ (Village Camp) लगाने का फैसला किया है।
सूदखोरी का जाल और 3 बोरी दस्तावेज
पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि दिलावर पठान और उसका परिवार गांव के गरीब लोगों को ऊंचे ब्याज पर कर्ज देता था। जब ग्रामीण कर्ज नहीं चुका पाते थे, तो उनकी जमीनें कौड़ियों के दाम पर हड़प ली जाती थीं। छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ तीन बोरे भरकर रजिस्ट्रियां, अनुबंध पत्र और जमीनी दस्तावेज लगे हैं प्राथमिक जांच में पता चला है कि आरोपी ने सैकड़ों बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है।
फर्जी वर्दी और सेना का ID कार्ड: खौफ का वो चेहरा
दिलावर पठान ने गांव में अपना रसूख बनाए रखने के लिए धोखाधड़ी का सहारा भी लिया था।
वर्दी का डर
तलाशी में उसके घर से पुलिस सब-इंस्पेक्टर की वर्दी और भारतीय सेना का फर्जी पहचान पत्र (Identity Card) मिला है।
दहशत
वह खुद को बड़ा अधिकारी बताकर ग्रामीणों को धमकाता था, जिसके कारण जमीन गंवाने के बाद भी कोई उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
फिल्मी एक्शन: 15 फीट ऊंची दीवार और 15 करोड़ का माल
दो दिन पहले हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने जब फैक्ट्री घेरी, तो बदमाशों ने अंदर से ताला लगा लिया था। पुलिस टीम 15 फीट ऊंची दीवार फांदकर अंदर घुसी और भारी मात्रा में 10 किलो 930 ग्राम एमडी ड्रग्स सहित कुल 15 करोड़ रुपये का मशरूका का जब्त किया है अब तक इस मामले में 16 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
प्रशासन का बड़ा कदम: पीड़ितों को मिलेगा न्याय
रतलाम पुलिस अब चिकलाना गांव में विशेष कैंप लगाने जा रही है।
- कैंप के जरिए उन वास्तविक जमीन मालिकों की पहचान की जाएगी जिनकी जमीनें डरा-धमकाकर छीनी गईं।
- पुलिस और राजस्व विभाग मिलकर कानूनी प्रक्रिया के तहत ग्रामीणों को उनकी जमीन वापस दिलाने का काम शुरू करेंगे।
- पुलिस ग्रामीणों को सुरक्षा का भरोसा दिला रही है ताकि वे बिना डरे गवाही दे सकें।




